गौरतलब है कि आयोग को कई अभ्यर्थियों से प्रार्थना-पत्र भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें उन्होंने अपनी श्रेणी को दिव्यांग से सामान्य अथवा अन्य श्रेणी में बदलने का अनुरोध किया है। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि इनमें से कई उम्मीदवार पहले से ही सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं। तृतीय श्रेणी शिक्षक, पटवारी और अन्य पदों पर नियुक्त इन अभ्यर्थियों की पिछली नियुक्तियां भी दिव्यांग कोटे के तहत हुई थीं।