
जयपुर।
भारतीय किसान आंदोलन के आह्वान पर विभिन्न मांगों के समर्थन में गांव बंद आंदोलन चल रहा है। राजस्थान के किसान संगठनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन देते हुए फल-सब्ज़ी और दूध को शहरों तक सप्लाई करना बंद कर दिया है। नतीजतन इन दैनिक ज़रूरतों की कीमतों पर असर देखने को मिल रहा है। फलों और सब्ज़ियों के भाव जहां आसमान छूते जा रहे हैं, वहीं दूध की सप्लाई भी ठप्प पड़ती नज़र आ रही है। किसान आंदोलन के नाम पर कई ज़िलों में उत्पात, उपद्रव और हंगामें की खबरें हैं जो अलग। आंदोलन को चार दिन बीत चुके हैं और मंगलवार को पांचवां दिन है। आंदोलन के चलते कानून व्यवस्था बुरी तरह से चौपट हो रही है, लेकिन इस पूरी तस्वीर पर सरकार जैसे कहीं नज़र ही नहीं आ रही है।
बेकाबू हो रहे हालात, मंत्रियों को नहीं कोई फिक्र!
पूनिया ने सरकार पर असहयोग का ज़िक्र करते हुए सरकार के मंत्रियों पर भी निशाना साधा है। उन्होंने डेयरी मंत्री अजय सिंह किलक पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने एक बार भी आंदोलन को लेकर हुए नुकसान और हालातों पर बातचीत तक नहीं की। हालांकि कृषि मंत्री ने फिर भी इस मामले में बातचीत की है।
डेयरी ने लगाया असहयोग का आरोप
किसान आंदोलन के चलते दूध की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। सरस डेयरी को गांवों से दूध के संकलन में कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। दूध के रोजाना होने वाले संकलन की तुलना में दूध का संकलन कम हुआ। रोज की तुलना में करीब साढे तीन से चार लाख लीटर दूध की आवक कम हुई। इस बीच जयपुर डेयरी के चेयरमेन ओमप्रकाश पूनिया ने पुलिस और प्रशासन पर असहयोग का आरोप लगाया है।
पुलिस भी बेबस, बोली- अपने स्तर पर निपटो!
आंदोलन के गरमाने के बाद जब डेयरी प्रबंधन सुरक्षा की गुहार लेकर पुलिस के पास पहुंचा तो खाकी ने हाथ खड़े कर दिए। पुलिस से जवाब मिला, 'हमने आक्रोशित किसानों को रोका तो बात और ज़्यादा बिगड़ जायेगी। इसलिए इस तरह की परेशानी को अपने स्तर पर ही निपटा जाए।
बस सिक रहीं सियासी रोटियां, नेता लगा रहे एक दूसरे पर आरोप
किसान आंदोलन से कई ज़िलों में व्यवस्थाएं बेपटरी हो गईं हैं। लेकिन इस पर काबू पाने की सरकार की कोशिशें दिखाई नहीं दे रहीं। न तो किसान संगठनों के साथ वार्ता हो रही है और ना ही भूमिपुत्रों से शांति व्यवस्था बनाये रखने की अपील ही हो रही है। हां, जनता से जुड़े इस गरमाये मुद्दे पर नेताओं की बयानबाजियां ज़रूर आ रही हैं।
किसान आंदोलन पर कांग्रेस और भाजपा एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे सरकार की नाकामी बता रही है तो वहीं भाजपा इसे विपक्ष की साजिश करार दे रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार किसान हितों की अनदेखी कर रही है। सरकार की संवादहीनता के कारण ही किसान आंदोलन की राह पर है। वहीं, कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी का कहना है कि कांग्रेस ने स्वामीनाथन की रिपोर्ट पर किसानों के लिए कोई काम नहीं किया।
पुलिस प्रोटेक्शन की उठने लगी मांग
आंदोलन के तहत किसानों के समर्थन में उतरे दूध सप्लायर्स ने भी संकलित किया गया दूध डेयरी को भेजना बंद कर दिया। जो दूध भेजा भी जा रहा है उन्हें बीच रास्तों पर रोककर खाली करवाया जा रहा है। लाखों लीटर दूध यूंही सडकों पर फैला दिया जा रहा है। ऐसे में अब पुलिस प्रोटेक्शन में दूध की सप्लाई की पुरज़ोर तरीके से मांग उठने लगी है।
पूनिया ने सरकार से प्रत्येक टैंकर पर 2-3 पुलिसकर्मी उपलब्ध करवाए जाने की मांग की है। ताकि निर्बाध रुप से गांवों से दूध संकलन किया जा सके। उनका कहना है कि डेयरी अब ज्यादा नुकसान उठाने के लिए तैयार नहीं है। डेयरी के 15 टैंकरों में तोडफ़ोड़ हो चुकी है और 50 हजार लीटर से ज्यादा दूध सड़कों पर बहाया जा चुका है। डेयरी टैंकरों में तोडफ़ोड़ और दूध फैलाने की कई घटनाओं से डेयरी को करीब एक करोड़ रुपए की चपत लग चुकी है। ऐसे में बिना पुलिस के सहयोग के दूध संकलन करना संभव नहीं है।
पूनिया ने साफ किया कि अगर डेयरी को दूध के परिवहन में पुलिस सुरक्षा नहीं उपलब्ध करवाई जाएगी तो आंदोलन के दौरान दूध का परिवहन बंद किया जा सकता है। सरस ने अपने गोल्ड दूध की सप्लाई बंद रखी। ताकि उपलब्ध दूध अधिक लोगों को मिल सके।
नहीं मिल रहा पुलिस का सहयोग
जयपुर डेयरी 650 बीएमसी से 150 टैंकरों के जरिए 10 से 11 लाख लीटर तक दूध संकलन रोज करती है। लेकिन आन्दोलन के चलते जगह-जगह डेयरी टैंकरों को रोककर दूध फैलाने की घटनाएं हुई हैं। इतना ही नहीं टैंकरों में तोडफ़ोड़ और चालकों के साथ मारपीट भी की जा रही है। समस्या को लेकर डेयरी मुख्य सचिव के साथ ही डीजीपी और जिला कलेक्टर को इसकी जानकारी दे चुकी है। पूनिया ने बताया कि कुछ हिस्सों में पुलिस का सहयोग नहीं मिल रहा है।
Updated on:
05 Jun 2018 01:05 pm
Published on:
05 Jun 2018 01:04 pm
