
जयपुर। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि राजस्थान देश में सरसों उत्पादन का प्रमुख राज्य है। यहां बड़ी संख्या में किसान सरसों की खेती पर निर्भर हैं। ओरोबैंके जैसे परजीवी खरपतवार किसानों के लिए बड़ी समस्या बने हुए हैं, जिससे उपज में भारी गिरावट आती है। कई बार फसल पूरी तरह खराब हो जाती है। सरकार किसानों को ऐसी तकनीक उपलब्ध कराने पर काम कर रही है, जिससे नुकसान कम हो और खेती टिकाऊ बने।
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि सरसों की खेती में आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाए। खरपतवार नियंत्रण की समस्या के कारण उत्पादन प्रभावित होता है और किसानों की आय पर असर पड़ता है। प्रभावी प्रबंधन से उत्पादन स्थिर रखा जा सकता है और खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती मिल सकती है।
इसी दिशा में निजी क्षेत्र की भागीदारी से नई गैर-जीएम तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की पहल की गई है। कोर्टेवा इंडिया और बीएएसएफ इंडिया की साझेदारी के तहत सरसों की खेती के लिए एक नई उत्पादन प्रणाली शुरू की गई है। यह प्रणाली पारंपरिक पौध प्रजनन से विकसित किस्मों पर आधारित है और खरपतवार नियंत्रण में सहायक बताई जा रही है।
देश में हर साल लगभग 80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की खेती होती है और उत्पादन 40 लाख टन से अधिक है। राजस्थान का इसमें बड़ा योगदान रहता है। ओरोबैंके जैसे खरपतवार कई इलाकों में 50 प्रतिशत तक उपज का नुकसान कर देते हैं। ऐसे में नई तकनीकों के माध्यम से किसानों को बेहतर विकल्प मिलना जरूरी है।
सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक नवाचार, गुणवत्तापूर्ण बीज और सही कृषि सलाह से सरसों उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इससे किसानों की आय में सुधार होगा और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
Published on:
18 Feb 2026 08:48 pm
