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पंचायत भूल गए बड़े नेता! CM भजनलाल और जूली समेत 10 विधायक Panchayati Raj से आए, लेकिन 73वें संशोधन की भावना ताक पर

राजस्थान में सीएम भजनलाल शर्मा, टीकाराम जूली और कन्हैयालाल खर्रा सहित करीब 10 विधायक पंचायत प्रतिनिधि रह चुके हैं। लेकिन बड़ी पंचायत में पहुंचने के बाद जमीनी समस्याएं नजरअंदाज हो रही हैं।
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जयपुर

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Arvind Rao

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Updated: 25 Apr 2026, 9:15 AM IST

Hypocrisy in Rajasthan Politics 10 Leaders Including CM Bhajanlal and Jully Came from Panchayati Raj but Forgot to Strengthen It

बड़ी पंचायत में पहुंच भूल गए पंचायतों के हाल (फोटो-एआई)

जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित करीब 10 विधायक पंचायती राज के रास्ते विधानसभा पहुंचे हैं। लेकिन इनके प्रमुख स्थिति में होने के बावजूद पंचायती राज को मजबूत बनाने की 73वें संविधान संशोधन की भावना ही ताक पर रह गई है।

इस संविधान संशोधन के अंतर्गत न केवल पंचायती राज संस्थाओं के हर पांच साल में चुनाव अनिवार्य कराने थे। बल्कि ग्रामीणों की स्थानीय सरकार (पंचायतों) को मजबूत बनाने के लिए उन्हें प्रशासनिक और वित्तीय संसाधन भी देने थे।

संविधान संशोधन के 33 साल बाद भी अधूरा

यह कार्य संविधान संशोधन के 33 वर्ष बाद भी अधूरा है। ग्रामीण विकास से जुड़ी संसदीय समिति ने पिछले साल पंचायती राज को मजबूत करने के लिए इनके चुनाव समय पर कराने पर जोर दिया, लेकिन मौजूदा विधानसभा में पंचायतों और शहरी निकायों की मजबूती के लिए 73 वें और 74 वें संविधान संशोधन की भावना पूरी कराने पर चर्चा नहीं कराई गई।

विधायकों को लगता है, पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के प्रतिनिधि मजबूत हो गए तो छोटे-मोटे विकास कार्यों के लिए उन्हें कौन पूछेगा? पंचायती राज संस्थाएं और शहरी निकाय संसद और विधानसभा में प्रवेश की सीढ़ी बन सकते हैं, जिसे भी सांसद-विधायक अपने लिए चुनौती मानते हैं।

पंचायती राज से निकले राजस्थान के ये नेता

सीएम भजनलाल शर्मा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी, नगरीय विकास राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा और शांति धारीवाल, विधायक दीपचंद खैरिया, कालूराम मेघवाल, शत्रुघ्न गौतम, हरलाल सहारण और गोविंद रानीपुरिया।