
जितेन्द्र सिंह शेखावत / जयपुर। गाय बैल आदि मवेशियों पर नियंत्रण के लिए प्रधानमंत्री सर मिर्जा इस्माइल ने दी जयपुर कैटल ट्रेस पास एक्ट 1943 बनाया था। इस कानून को 1871 के इंडियन कैटल ट्रेस पास एक्ट की तर्ज पर लागू किया गया। इस कानून के लागू होने के बाद गाय, बैल, ऊंट, गर्दभ के अलावा खच्चर व घोड़ों को स्वच्छंद विचरण के लिए सड़कों पर छोड़े पर अंकुश लग गया था।
शपथ पत्र देने पर छोडते थे
अगर कोई मवेशी बाजारों में घूमता नजर आता तब नगर परिषद के कर्मचारी उसे लावारिस मानकर दवाबखाने में बंद कर देते थे। गाय आदि मवेशियों को उसके मालिक से शपथ पत्र लेकर इस ताकीद के साथ छोड़ा जाता कि वह गाय या बैल आदि मवेशी को खुला नहीं छोड़ेगा। इसके बाद भी उसकी गाय कहीं भी दुबारा पकड़ी जाती तब दस रुपया जुर्माना लगाया जाता।
सभी घरों में थे मवेशी
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण चन्द्र छाबड़ा के मुताबिक प्राय: सभी घरों में गायें रहती और सुबह उन्हें चराने के लिए ग्वाला जंगल में लेकर जाता। उस समय सफाई की बहुत अच्छी व्यवस्था थी। दोनों समय सड़कों की सफाई होती और बैल व ऊंट गाडिय़ां व तांगे चलते थे। इनके गोबर व लीद को उठाने के लिए सड़कों पर कर्मचारी मुस्तैदी के साथ तैनात रहते।
हजार बीघा गोचर के लिए की दान
जयपुर फाऊण्डेशन के सियाशरण लश्करी के पास मौजूद रिकार्ड के मुताबिक सन् 1931 में शासन का पूरा अधिकार मिलने पर सवाई मानसिंह ने आगरा रोड पर एक हजार बीघा गोचर के लिए दान की थी। इस गोचर में केवल गायें ही चर सकती थी। दूध की व्यवस्था के लिए जनानी ड्योडी के सामने ग्वालेरा में अनेक गाएं रहती। ब्रिगेडियर भवानी सिंह की माता महारानी मरुधर कंवर ने जैसला में गायों को चराने के लिए एक हजार बीघा का गोचर बीड़ था। पत्रावली के अनुसार 7 नवम्बर 1929 को इस गोचर भूमि से चारा चोरी करने वाले से 14 रुपया जुर्माना वसूल किया गया।
Published on:
23 Nov 2017, 8:41 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.