15 अगस्त 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जयपुर में CNG संकट का बड़ा असर: 3 घंटे लंबी लाइनों में लगने से थमने लगी शहर की रफ्तार, रोज ₹1 करोड़ का नुकसान

राजधानी जयपुर में सीएनजी संकट के कारण शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगता नजर आ रहा है। शहर के मात्र 38 सीएनजी पंपों पर रोजाना सुबह से रात तक 3-3 घंटे लंबी कतारें लग रही हैं। इस वजह से 60 हजार से अधिक कार और ऑटो चालकों को रोज 4 से 5 राइड्स का नुकसान हो रहा है, जिससे उनकी कमाई में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।
2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Arvind Rao

Aug 15, 2026

jaipur cng crisis

सीएनजी भरवाने के लिए पेट्रोल पंप पर खड़े वाहन (पत्रिका फोटो)

Jaipur CNG Crisis News: जयपुर: सीएनजी पंपों पर लगी कतार सिर्फ वाहन चालकों की परेशानी नहीं, जयपुर की अर्थव्यवस्था के लिए भी नुकसानदेय बन गई है। शहर के 38 सीएनजी स्टेशनों पर एक-एक किलो गैस के लिए सीएनजी कार, ऑटो चालक सुबह से रात तक औसतन तीन-तीन घंटे कतार में लग रहे हैं। ऐसे में शहर में 60 हजार से ज्यादा सीएनजी कार और ऑटो चालकों की कमाई भी दिन भर में 30 से 35 प्रतिशत तक घट रही है। 3 घंटे कतारों में लगने के बाद जब पूरे दिन का हिसाब लगाया जा रहा है तो अप्रत्यक्ष तौर पर शहर की अर्थव्यवस्था को 75 लाख से 1 करोड़ रुपए तक का नुकसान रोजाना हो रहा है।

38 सीएनजी स्टेशन-एक पर 1750 वाहन, मांग 2 लाख किलो के पार

जयपुर शहर में सीएनजी वाहनों की संख्या के मुकाबले गैस सप्लायर टोरेंट कंपनी सीएनजी नेटवर्क का विस्तार नहीं कर सकी है। अभी स्थिति ऐसी है कि शहर में 38 सीएनजी स्टेशन हैं और औसतन एक सीएनजी स्टेशन पर 1750 सीएनजी वाहनो का भार आ गया है। भार के मुकाबले सीएनजी की मांग भी 1.50 लाख किलो की जगह 1 लाख किलो से भी पार निकल गई है।

ऐसे समझे कतारों के नुकसान का गणित

  • 10-12 घंटे रोजाना ड्राइविंग-1200 से 1500 रुपए तक कमाई
  • 12 किलो तक गैस भरी जाती है सीएनजी कार में
  • 3 घंटे सीएनजी के लिए पंप पर कतार में 4 से 5 राइड्स का नुकसान
  • 40 प्रतिशत तक रोजाना की कमाई में गिरावट
  • 500 से 800 तक घट रही दिन भर की कमाई
  • स्त्रोत-परिवहन विभाग
  • स्रोत-फाउंडेशन

पाइप लाइन नेटवर्क भी कमजोर, ट्रकों से परिवहन

पड़ताल में यह भी सामने आया है कि शहर में सीएनजी सप्लाई का नेटवर्क भी कमजोर है। पाइप लाइन की जगह 90 फीसदी पंपों पर टैंकरों के जरिए गैस सप्लाई हो रही है। ऐसे में दिन कभी भी पंप ड्राई होने हो जाते हैं।

भविष्य की राहः सीएनजी बनाम ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर

  • रनिंग कॉस्ट (प्रति किमी): जहां सीएनजी गाड़ी चलाने का खर्च 2.80 से 3.50 प्रति किमी आता है। वहीं, ई-व्हीकल (ईवी) में यह लागत घटकर मात्र 0.80 से 1.20 प्रति किमी रह जाती है। (स्रोतः ऊर्जा एवं परिवहन मंत्रालय आंकड़े)
  • रिफ्यूलिंग समयः सीएनजी भरने में सामान्यत 5-10 मिनट लगते हैं (कतार छोड़कर), जबकि ईवी को फास्ट चार्जर पर भी चार्ज होने में 45 से 60 मिनट का समय लगता है। (स्रोतः ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर रिपोर्ट)
  • सप्लाई संवेदनशीलताः सीएनजी व्यवस्था पूरी तरह पाइपलाइन नेटवर्क पर निर्भर है, एक जगह खराबी यानी पूरे शहर में सप्लाई ठप। इसके विपरीत, ईवी चार्जिंग नेटवर्क वितरित पावर ग्रिड पर काम करता है। (स्रोतः राजस्थान पत्रिका कवरेज व डिस्कॉम डेटा)

समाधानः 3 जरूरी कदम

  • टॉरेंट गैस व संबंधित एजेंसियां शहर में मुख्य ट्रंक लाइन के साथ समानांतर आपातकालीन लूप लाइन तैयार करें।
  • हर बड़े सीएनजी स्टेशन पर एलसीएनजी/कैस्केड स्टोरेज क्षमता बढ़ाई जाए, ताकि पाइपलाइन कटने पर भी 24 घंटे गैस उपलब्ध रहे।
  • सिंधी कैंप, जयपुर जंक्शन, एयरपोर्ट और मानसरोवर जैसे प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब पर फास्ट चार्जिंग नेटवर्क खड़ा किया जाए।