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Patrika National Book Fair : ‘जो किया तूने तेरे सामने वो आएगा…’, शेर-ओ-शायरी की महफिल में श्रोताओं ने उठाया लुत्फ

Patrika National Book Fair : जयपुर के जवाहर कला केंद्र में पत्रिका नेशनल बुक फेयर में गुरुवार शाम को शेर-ओ-शायरी की महफिल जमी और श्रोताओं ने खूब लुत्फ उठाया।

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Jaipur Jawahar Kala Kendra Patrika National Book Fair audience enjoyed Sher-o-Shayari gathering

जयपुर में पत्रिका नेशनल बुक फेयर में शेर-ओ-शायरी की महफिल का दृश्य। फोटो पत्रिका

Patrika National Book Fair : जयपुर में पत्रिका नेशनल बुक फेयर में गुरुवार शाम को शेर-ओ-शायरी की महफिल जमी और श्रोताओं ने खूब लुत्फ उठाया। ‘उर्दू की बात अशआर के साथ’ सत्र में नामचीन शायर शसुद्दुहा खान हकीम, डॉ. शाइस्ता मेहजबीं और अय्यूब खान बिस्मिल ने नज्म सुनाई और शायरी से जुड़े अनुभव सुनाए।

पत्रिका नेशनल बुक फेयर में शाइस्ता मेहजबीं ने अपनी नज्म ‘औरत हूं, मेरे दम से है सब रौनक-ए-जहां, यूं ही नहीं जमीन पे उतारा गया मुझे….’ सुनाई तो श्रोताओं ने खूब दाद दी। अय्यूब बिस्मिल ने ‘कितनी रातें जाग के हमने लहू जलाकर शेर कहे, लोग समझते हैं हमने बस कलम उठाकर शेर कहे…’ पर वाहवाही लूटी।

जो बोए खार तो फिर फूल कैसे पाएगा… - शसुद्दुहा खान हकीम

शसुद्दुहा खान हकीम ने सुनाया ‘जो किया तूने तेरे सामने वो आएगा, जो बोए खार तो फिर फूल कैसे पाएगा…’ सुनाकर माहौल को शायराना बनाया। शसुद्दुहा ने वास्तविक शायरी और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही शायरी के बीच का अंतर स्पष्ट किया। साथ ही कहा कि लोग शायरी को सही तरीके से समझे बिना उसे तोड़-मरोड़ कर पेश कर देते हैं।

उन्होंने युवा पीढ़ी को संदेश दिया कि शायरी को समझने और उसमें महारत हासिल करने के लिए खूब पढ़े और शब्दों का सही उच्चारण सीखें।

एक शायर केवल शब्दों को नहीं लिखता - अय्यूब खान

अय्यूब खान ने बताया कि एक शायर केवल शब्दों को नहीं लिखता, बल्कि उसके पीछे के दर्द, खुशी और जिंदगी की जटिलताओं को बयां करता है। मॉडरेशन वरिष्ठ पत्रकार चांद मोहमद शेख ने किया।