
न्याय की आस में जलती मोमबत्तियां (फोटो- पत्रिका)
Nahargarh Road Hit and Run Anniversary: जयपुर: सात अप्रेल की वह स्याह रात जयपुर कभी नहीं भूल सकता, जब नाहरगढ़ रोड पर रफ्तार और नशे की सनक ने तीन हंसते-खेलते परिवारों पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया था।
आज उस खौफनाक मंजर को एक साल बीत गया है। शनिवार शाम जब शहीद स्मारक पर मोमबत्तियां जलीं, तो उनकी लौ में न्याय की आस कम और सिस्टम की बेरुखी का दर्द ज्यादा साफ नजर आ रहा था।
आरोपी जेल गया, पार्टी से निकाला गया, लेकिन इन परिवारों के लिए न्याय की घड़ी जैसे वहीं रुक गई है। अदालती कार्रवाई और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी के बीच ये परिवार आज भी उसी मोड़ पर खड़े हैं, जहां एक साल पहले खड़े थे। शनिवार को निकाला गया यह कैंडल मार्च केवल विरोध नहीं, बल्कि उस सिस्टम को जगाने की एक कोशिश थी जो वादे करके भूल गया है।
7 अप्रेल 2025 की उस रात, रसूख और नशे में डूबी एक एसयूवी (जिसका चालक तत्कालीन कांग्रेस नेता उस्मान खान था) मौत बनकर नाहरगढ़ की गलियों में दौड़ी थी। सीसीटीवी में कैद उन तस्वीरों ने पूरे जयपुर की रूह कंपा दी थी। इस हादसे ने अवधेश कुमार, ममता कंवर और वीरेंद्र सिंह को हमेशा के लिए छीन लिया, जबकि 6 लोग आज भी उस जख्म के निशान ढो रहे हैं।
हादसे में अपनी पत्नी ममता कंवर को खोने वाले सुरेंद्र सिंह राठौड़ की रुआंसी आवाज पत्थर को भी पिघला दे। वे कहते हैं, मेरे घर में चूल्हा जलाने वाली चली गई…दुनिया के लिए वह सिर्फ एक आंकड़ा थी, मेरे बच्चों के लिए उनकी पूरी दुनिया।
नेताओं ने 50-50 लाख के मुआवजे का वादा किया था, हाथ जोड़कर उनके चक्कर काटे, पर आज एक साल बाद भी खाली हाथ हैं। पैसा मेरी पत्नी को वापस नहीं ला सकता, पर क्या सरकार का वादा मेरे बच्चों के भविष्य को सहारा नहीं दे सकता?
यही टीस स्वर्गीय अवधेश पारीक के भाई अमित पारीक के सीने में भी है। वे बताते हैं कि पिछले एक साल में वे कई बार सांसद मंजू शर्मा और विधायक बालमुकुंदाचार्य की दहलीज पर गुहार लगा चुके हैं।
अमित सवाल उठाते हैं, हैरानी होती है कि कि जो सत्ता में हैं। वहीं, प्रतिनिधि कहते हैं कि सरकार कुछ नहीं कर रही। क्या हमारे अपनों की जान इतनी सस्ती थी कि साल भर बाद भी सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं?
हादसे का दंश झेल रहे अजीत सिंह सांखला ने हादसे में छोटी बहन ममता कंवर (सुरेंद्र सिंह राठौड़ की पत्नी) और बड़े भाई वीरेंद्र सिंह को हमेशा के लिए खो दिया। नम आंखों से अजीत कहते हैं, एक व्यक्ति की चंद मिनटों की लापरवाही और नशे के जुनून ने हमारे हंसते-खेलते परिवार को ताश के पत्तों की तरह उजाड़ दिया।
वह रात मैं चाहकर भी कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पीड़ित परिवारों को न्याय और आर्थिक संबल के लिए यों ही सड़कों पर भटकना पड़ेगा?
Published on:
12 Apr 2026 09:59 am
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