
दिवाली पर जयपुर में पटाखों की बिक्री,पत्रिका फोटो
Patrika Investigation: देशभर में आग की चिंताजनक घटनाओं के बीच राजधानी जयपुर में इस बार गली-गली और बाजारों में पटाखों के लाइसेंस रेवड़ियों की तरह बांट दिए गए है। लाइसेंस जारी करने - में किसी तरह की गाइडलाइन की पालना नहीं की गई है। पेट्रोल पंप के पास तो घरों के नीचे, रेस्टोरेंट के पास तो संकरी गलियों में पटाखों की दुकानें खुल गई हैं। ये दुकानें संभावित हादसों का बड़ा खतरा बनी हुई है। यदि आग लगी तो बचाव दल के लिए वहां तक-पहुंचना भी मुश्किल होगा।
राजस्थान पत्रिका टीम ने शनिवार को शहर के विभिन्न इलाकों में पड़ताल की। टीम पटाखा व्यापारियों के पास खरीदार और छोटे व्यापारी बनकर पहुंची। टीम ने व्यापारियों से - लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया के - बारे में पूछा और मदद मांगी। इस दौरान जिम्मेदारों की कार्यशैली की पोल खुल गई। व्यापारियों ने साफ कहा कि एक नंबर में फीस भले कम हो, लेकिन लाइसेंस के लिए दो नंबर में मोटा खर्चा करना पड़ता है।
सुभाष चौक से पानों का दरीबा जाने वाले रास्ते में कॉर्नर के मकान के नीचे पटाखों की दो दुकानें साथ-साथ हैं। पत्रिका संवाददाता ने जब इन व्यापारियों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि दोनों दुकानों की दिशा अलग-अलग है, इसलिए लाइसेंस मिल जाता है। संवाददाता ने पूछा कि यदि एक दुकान में हादसा हो जाए तो दो कदम की दूरी पर स्थित दूसरी दुकान भी तो चपेट में आ सकती है? व्यापारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं था।
चांदी की टकसाल से ख्वासजी के रास्ते के कॉर्नर पर एक दुकान में धड़ल्ले से पटाखे बेचे जा रहे हैं। इस दुकान के एक और ढाबा रेस्टोरेंट है, तो दूसरी ओर एक दुकान छोड़कर चाय की दुकान चल रही है। यानी दोनों ओर आग और भट्टी जलाई जा रही है। ऐसे में यहां नियमों की खुली अनदेखी की गई है।
रिपोर्टरः पटाखे बेचने का लाइसेंस दिलवा सकते हो?
कारोबारीः आप लेट आए हो,
रिपोर्टरः खर्चा कैसा, लाइसेंस तो आवेदन से मिल जाता है?
कारोबारीः एक नंबर में फीस मामूली है, लेकिन दो नंबर में खर्चा मोटा होता है।
रिपोर्टरः कितना खर्चा लग जाता है?
कारोबारीः कारोबार देखते हुए चालीस हजार से दो लाख रुपए तक लग जाते हैं।
रिपोर्टरः ऐसा भी होता है क्या?
कारोबारीः सेटिंग से सब काम हो जाता है। किशनपोल बाजार में जाकर देखो।
पेट्रोल पंप, गैस गोदाम, तेल भंडारण केंद्र आदि के पास (कम से कम 50 से 100 मीटर की दूरी आवश्यक)
भीड़भाड़ वाले बाजार, मॉल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, धार्मिक स्थलों के आसपास घनी आबादी वाले रिहायशी क्षेत्रों के बीच या पास स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों के पास संकरी गलियों या बंद स्थानों में अस्थायी निर्माण या झुग्गी-बस्तियों के पास, जहां आग लगने की स्थिति में बड़ा नुकसान हो सकता है। ऊंची इमारतों के बेसमेंट या ऊपरी मंजिल पर इलेक्ट्रिक ट्रांसफार्मर या हाई-वोल्टेज बिजली की लाइनों के पास जहां खुली हवा का पर्याप्त प्रवाह न हो,अग्निशमन यंत्र और फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य होना चाहिए।
Published on:
19 Oct 2025 10:26 am
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