
जयपुर में संक्रांति पर होने होने वाली पतंगबाजी देश ही नहीं विदेशों में भी खासी लोकप्रीय है। इस साल संक्रांति पर जयपुर में करीब 15 करोड़ रुपए का पतंग डोर का कारोबार का अनुमान है। पूरे राजस्थान की बात करें तो, करीब 25 करोड़ रुपए का कारोबार होगा। इसमें से जयपुर में ही 15 करोड़ रुपए का कारोबार होता है। जयपुर में दो से तीन हजार कारीगर पतंग बनाने के कारोबार से जुड़े हैं। जयपुर पतंग उद्योग के अध्यक्ष संजय गोयल ने बताया कि पतंग व्यापारी लंबे समय से ऐसे लघु उद्योग का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इस मांग पर ध्यान नहीं दिया गया है। पतंग बनाने में ज्यादातर अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाएं शामिल हैं। फिर भी बरेली से आने वाली पतंग डोर का कारोबार ज्यादा है। इस बार कच्चा माल महंगा होने से पतंग डोर की कीमतों में 35 से 40 फीसदी की तेजी आई है। ये पतंगें 7 रुपए से लेकर 50 रुपए तक बिक रही है। मांझे का एक चरखा 400 रुपए से लेकर 4000 रुपए में बिक रहा है। इस बार पतंगों की अच्छी बिक्री हो रही है।
सर्दी में बढ़ी फीणियों की मांग
कड़ाके की सर्दी और मकर संक्रांति के कारण फीणियों का कारोबार बढ़ गया है। संक्रांति पर फीणी का इस्तेमाल शुभ होने के साथ—साथ लाभदायक भी माना जाता है। इसलिए संक्रांति के अवसर पर शहर में फीणी की अच्छी मांग रहती है। व्यापारी भी पहले से ही संक्रांति की तैयारी शुरू कर देते हैं। व्यापारीयों का कहना है कि पिछले सालों की तुलना इस साल फीणियों के दामों में 20 से 40 रुपए तक की वृद्धि हुई है, लेकिन इसका बिक्री पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
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गजक की महक से गुलजार बाजार
सर्दी का टॉनिक मानी जाने वाली गजक की भी इन दिनों खासी ग्राहकी दिखाई दे रही है। हालांकि इस साल लोगों को इनकी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। जयपुर में गजक का कारोबार सदियों पुराना है, लेकिन कई युवा व्यवसायियों ने व्यापार के आधुनिक तरीके अपनाकर जयपुर की गजक को दुनियाभर में पहुंचा दिया है। अब जयपुर से गजक का एक्सपोर्ट भी होता है। पिछले साल गजक 300 रुपए किलो थी, जो अब बढ़कर 350 से 400 रुपए किलो तक पहुंच गई है। इस साल गजक के दामों में पिछले साल के मुकाबले 25 से 50 रुपए किलो की तेजी आई है।
Published on:
14 Jan 2023 10:45 am
