8 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

25 की उम्र में ही छूट गया था पति का साथ, खुद को टूटने नहीं दिया, बेटों को बनाया अफसर

Motivational Story : ब्लड कैंसर से पति के निधन के बाद मन्नी देवी एक बार तो पूरी तरह टूट चुकी थी। लेकिन उसने हौंसला नहीं खोया। पति की जगह अनुकंपा पर बैंक में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी की और बच्चों की परवरिश की।

2 min read
Google source verification
motivational story of mother in rajasthan who worked hard and made both her sons Officers

Motivational Story : गिरिराज प्रसाद शर्मा/बांसखोह (जयपुर)। ब्लड कैंसर से पति के निधन के बाद मन्नी देवी एक बार तो पूरी तरह टूट चुकी थी। लेकिन उसने हौंसला नहीं खोया। पति की जगह अनुकंपा पर बैंक में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी की और बच्चों की परवरिश की। अपने दोनों बेटों को काबिल बनाया। एक बेटे को आईएएस एवं दूसरे बेटे को इनकम टैक्स ऑफिसर बनाया। यह कहानी जयपुर जिले के पाटन गांव निवासी मन्नी देवी मीना की है।

रोजाना तय करती हैं 25 किलोमीटर का सफर
पति की मौत के समय मन्नी देवी की उम्र 25 वर्ष थी। उस दौरान मन्नी देवी के उनका बड़ा बेटा 4 और छोटा बेटा 2 वर्ष का था। पति की मौत के बाद टूट चुकी मन्नी देवी ने हौंसला नहीं खोया और अपने बच्चों का पूरी तरह से लालन पालन किया।

यह भी पढ़ें : पति की मौत के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, बच्चों को पालने के लिए उठाया पेचकस-पाना, अब बन गई मिसाल

इसी दौरान 2004 में मन्नी देवी की अनुकंपा पर बैंक में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नियुक्ति मिली। मन्नी देवी पाटन गांव से दौसा बैंक के लिए 25 किमी की दूरी प्रतिदिन तय करती और अपने बच्चों की भी परवरिश करती।

गांव के ही सरकारी स्कूल में आठवीं तक पढ़कर बड़ा बेटा धर्मसिंह बाद में जयपुर,दिल्ली में पढ़ाई करते हुए अभी हाल ही में तीसरे प्रयास में आईएएस अधिकारी बना। वहीं छोटा बेटा विश्वराज का सीजीएल इनकम टैक्स में चयन हुआ। अब भी मन्नी देवी बैंक में कार्यरत है। गांव में वह अन्य महिलाओं की प्ररेणा बन गई हैं।

यह भी पढ़ें : मां ने चूड़िया बेचकर बेटे को सीआरपीएफ में बनाया SI, खुशी से झूम उठा परिवार