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पति की मौत के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, बच्चों को पालने के लिए उठाया पेचकस-पाना, अब बन गई मिसाल

Inspirational Story: एक महिला जिसने शादी के बाद हंसते-खेलते ससुराल के आंगन का सपना देखा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शादी के कुछ समय बाद ही पति की मौत हो गई। फिर शुरू हुआ संघर्ष। यह कहानी है मोहिनी देवी की, जिन्होंने हिम्मत से काम लिया और बसों की मरम्मत में जुट गईं। लोग उन्हें देख हैरान होेते हैं।
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जोधपुर

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Akshita Deora

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Updated: 20 Aug 2023, 11:33 AM IST

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जयकुमार भाटी@जोधपुर. Inspirational Story: एक महिला जिसने शादी के बाद हंसते-खेलते ससुराल के आंगन का सपना देखा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शादी के कुछ समय बाद ही पति की मौत हो गई। फिर शुरू हुआ संघर्ष। यह कहानी है मोहिनी देवी की, जिन्होंने हिम्मत से काम लिया और बसों की मरम्मत में जुट गईं। लोग उन्हें देख हैरान होेते हैं। मोहिनी राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के जोधपुर डिपो के केन्द्रीय कार्यशाला में मैकेनिक द्वितीय ग्रेड पद पर कार्य कर रही हैं।

पेचकस, पाने और प्लास हैं हिम्मत
मोहिनी ने बताया शादी के कुछ समय बाद ही पति के निधन हो गया था। तब उन्होंने संविदा के रूप में राजस्थान रोडवेज के जयपुर डिपो में 1999 में मैकेनिक का काम संभाल लिया। जल्द ही वह पेचकस, प्लास और पानों के साथ खेलने लगीं। उस वक्त उनके बच्चे छोटे थे। ऐसे में सरकारी सेवा में कार्य करना चुनौती भरा रहा। बच्चों को संभालने वाला कोई नहीं था। दोनों बच्चों को घर में भगवान भरोसे छोड़ वह काम पर गईं और शाम को घर का काम करने के साथ बच्चों को पढ़ाई करवाई। आज दोनों बच्चे निजी कंपनियों में काम कर रहे हैं।
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काम का बंटवारा महिला-पुरुष के आधार पर न हो
मोहिनी इस बात की मिसाल हैं कि काम का बंटवारा पुरुष और महिला के आधार पर नहीं किया जा सकता। जिला प्रशासन पिछले साल उनके हौसले के लिए उन्हें सम्मानित कर चुका है।