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सियासी भंवर में विकास… पहले बोर्ड में 47 बैठक, इस बार ग्रेटर में पांच, हैरिटेज में सिर्फ खाता ही खुला

दोनों शहरी सरकारों की साधारण सभा से दूरी, आपसी खींचतान और राजनीतिक विवाद हावी

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सियासी भंवर में विकास... पहले बोर्ड में 47 बैठक, इस बार ग्रेटर में पांच, हैरिटेज में सिर्फ खाता ही खुला

सियासी भंवर में विकास... पहले बोर्ड में 47 बैठक, इस बार ग्रेटर में पांच, हैरिटेज में सिर्फ खाता ही खुला

जयपुर. राज्य के विकास और चर्चा के लिए विधानसभा सत्र होता है। उसी तरह शहर के विकास की चर्चा के लिए नगर निगम की साधारण सभा होती है। साधारण सभा में जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है और महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं। धीरे-धीरे उन फैसलों पर अमल किया जाता है, लेकिन नगर निगम में साधारण सभा का बुरा हाल है। यहां बैठकों की संख्या लगातार कम हो रही है। राजधानी के दोनों नगर निगम की बात करें तो इस कार्यकाल के ढाई वर्ष में ग्रेटर नगर निगम की पांच और हैरिटेज निगम की एक ही बैठक हुई है। मौजूदा हाल यह है कि हैरिटेज नगर निगम की सरकार बिना महापौर के ही चल रही है।

बजट बैठक भी नहीं

आपसी खींचतान और सियासी विवाद के बीच बजट के लिए भी दोनों शहरी सरकारों ने बैठक नहीं बुलाई। विरोध की आशंका को देखते हुए दोनों महापौर ने बजट पारित कराने के लिए भी बैठक नहीं बुलाई और सीधे राज्य सरकार को बजट भेज दिया।

हैरिटेज निगम: महापौर पर भारी विधायकों की सियासत

निर्दलीयों के समर्थन से महापौर की कुर्सी कांग्रेस के खाते में आई, लेकिन विधायकों का दखल इतना है कि ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी समितियों का गठन नहीं हो पाया। ऐसे में निर्दलीय विरोध में उतर आए। महापौर से कांग्रेस के पार्षद भी नाराज हो गए। इससे हुआ यह कि महापौर ने साधारण सभा से दूरी बना ली। एक साधारण सभा करवाने के बाद दूसरी के लिए ढाई साल में भी हिम्मत नहीं जुटा पाईं। अब तो स्थिति यह है कि 22 सितम्बर को मुनेश गुर्जर के निलम्बन के बाद महापौर की कुर्सी खाली है।

ग्रेटर निगम: अस्थिरता का माहौल

भाजपा की महापौर के लिए राज्य सरकार ने दिक्कतें पेश की। महापौर का निलम्बन तक हुआ। यहां साधारण सभा राजनीतिक अस्थिरता की भेंट चढ़ गई। भाजपा के पार्षदों में भी कई गुट बन गए। ऐसे में विरोधी गुट के ज्यादा हावी होने की वजह से महापौर बैठक बुलाने से बचती रहीं। हालांकि, महापौर सौम्या गुर्जर अब तक पांच साधारण सभा करवा चुकी हैं।

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फैसलों पर भी अमल नहीं(फरवरी, 2021 में )

-हैरिटेज नगर निगम के 100 वार्डों में सीसीटीवी कैमरे लगाने पर अमल नहीं।

-ठोस कचरा निस्तारण को लेकर प्लांट लगाने पर भी हैरिटेज सरकार आगे नहीं बढ़ पाई।

-कचरे से बिजली बनाने का काम भी गति नहीं पकड़ पाया है।

(जनवरी, 2021)

-ग्रेटर सीमा क्षेत्र के महाविद्यालयों, कोचिंग और एजुकेशन हब के नजदीक जमीन चिह्नित कर ई-लाइब्रेरी का निर्माण कराया जाएगा।

-कच्ची बस्ती में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर उठाने के लिए कार्ययोजना तैयार कर विकास कार्य कराए जाएंगे।

-वाहनों के लिए ई-चार्जिंग स्टेशन लगवाए जाएंगे।

.....(जून, 2023)

-ग्रेटर निगम में ग्रीन बॉन्ड लाने की बात कही, लेकिन अब तक इस पर कोई काम शुरू नहीं हुआ है।

टॉपिक एक्सपर्ट

नगर पालिका अधिनियम-2009 के प्रावधानों के अनुसार निगम को वर्ष में छह और 60 दिन में एक बैठक करना अनिवार्य है। तय समय में बैठक नहीं करने पर राज्य सरकार कार्रवाई कर सकती है। सारी शक्तियां बोर्ड के पास होती है और निर्णय बोर्ड बैठक में होते हैं। यदि बैठक नहीं होगी तो निर्णय नहीं हो पाएंगे। साधारण सभा में जनहित के मुद्दों पर चर्चा होती है और उनकी क्रियान्विति का रोडमैप बनता है।

-अशोक सिंह, सेवानिवृत्त, विधि निदेशक, स्वायत्त शासन विभाग

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साधारण सभा की बैठकों का हाल

बोर्ड- -बैठकों की संख्यापहला -47

दूसरा -41

तीसरा -20

चौथा -23

पांचवां -13

दो निगम बनने के बाद ये हाल

नगर निगम हैरिटेज-01

नगर निगम ग्रेटर-05

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