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Jaipur: ‘पापा उठो ना…मम्मी देखो छोटे से भाई को कहां ले जा रहे हैं’ माता-पिता के शव से लिपटकर रोती रही चारों बहनें, सड़क हादसे में हो गई अनाथ

4 Girl Became Orphan: बड़ी बेटी बार-बार चीख रही थी… पापा उठ जाओ, मम्मी देखो… भाई को ले जा रहे हैं। उसकी चीख ने वहां मौजूद हर इंसान का दिल छलनी कर दिया।

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फोटो: पत्रिका

Jaipur Car Accident: जयपुर के शिवदासपुरा में रविवार अलसुबह रिंग रोड के नीचे कार गिरने से सात लोगों की मौत हो गई। उन्हीं में वाटिका निवासी रामराज, उनकी पत्नी मधु और 14 माह का मासूम रुद्र भी शामिल थे।

यह परिवार हरिद्वार से अपने परिजन की अस्थियां विसर्जित कर लौट रहा था, लेकिन नियति ने ऐसी करवट ली कि खुशहाल घर-परिवार चंद पलों में उजड़ गया। जिस बेटे (रुद्र) के जन्म पर कुछ महीने पहले घर-आंगन गूंजा था उसी की अर्थी ने अब पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया।

रामराज की चार बेटियों के बाद जब रुद्र का जन्म हुआ। बेटे की चाह में वर्षों तक मंदिर-मंदिर माथा टेकने वाले रामराज और मधु की गोद आखिरकार भरी थी। इस खुशी में चार महीने पहले 400 से अधिक लोगों को बुलाकर दावत दी गई थी। लेकिन आज वही बेटा, जिसकी किलकारियां आंगन में गूंजती थीं, तस्वीरों में कैद होकर रह गया। सोमवार को वाटिका स्थित आर.के. सिटी चतुर्थ निवासी रामराज के घर पर ताला लगा था और बाहर खामोश भीड़ थी।

‘पापा उठ जाओ, मम्मी देखो… भाई को ले जा रहे हैं’

महात्मा गांधी अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद रविवार को ही शवों को परिवार के लोग अंतिम संस्कार के लिए भीलवाड़ा स्थित गांव ले गए थे। सोमवार को जब अंत्येष्टि की गई तो माहौल गमगीन हो उठा। गली में सन्नाटा छा गया और हर चेहरे पर आंसू थे। शोकसभा में चारों बेटियां अपने माता-पिता और भाई को देख बेसुध होकर रो पड़ीं।

बड़ी बेटी बार-बार चीख रही थी… पापा उठ जाओ, मम्मी देखो… भाई को ले जा रहे हैं। उसकी चीख ने वहां मौजूद हर इंसान का दिल छलनी कर दिया। छोटी बेटियां मां के पार्थिव शरीर को पकड़कर बार-बार यही कह रही थीं… मम्मी हमें छोड़कर मत जाओ। रिश्तेदार और पड़ोसी बच्चों को थामने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सिसकियां थमने का नाम नहीं ले रही थीं।

‘अच्छा पड़ोसी और सच्चा इंसान खो दिया’

रामराज के वाटिका स्थित घर के पड़ोसी इन्द्र कुमार से बात की तो उनकी आंखें छलक आईं। उन्होंने कहा, दस साल पहले रामराज के पिता पीरूमल वैष्णव ने यह मकान लिया था। हादसे का पता चला तो हमारे पैरों तले जमीन खिसक गई। रामराज स्वभाव के बहुत अच्छे थे व सभी का सहारा थे। आधी रात को भी कोई मदद मांगता तो तुरंत तैयार मिलते। आज हमने एक अच्छा पड़ोसी और सच्चा इंसान खो दिया।

‘पिता व भाई चलाते ऑटो, रामराज चलाते थे टैक्सी’

पीरूमल और उनका बेटा धर्मराज ऑटो चलाते हैं, जबकि रामराज टैक्सी चलाकर परिवार का सहारा बने हुए थे। सोमवार को घर के बाहर पीरूमल का ऑटो खड़ा था। पड़ोस में रहने वाले इलेक्ट्रीशियन भवानी सिंह ने बताया, रामराज का हर किसी से अच्छा व्यवहार था। दुख-सुख में वे हमेशा खड़े रहते थे। उनकी कमी हमेशा खलेगी।


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