
राजस्थान पत्रिका के अमृतं जलम् अभियान के तहत आमेर रोड परशुराम द्वारा की बावड़ी पर श्रमदान। फोटो रघुवीर सिंह
Patrika Amritam Jalam Abhiyaan : जयपुर में हाथों में झाडू और तगारियां, श्रमदान के लिए लगी कतारें और जल संरक्षण के नारों से गूंजता परिसर…शनिवार सुबह मानसागर झील के सामने स्थित परशुराम द्वारा की बावड़ी पर कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दिया। मौका था पत्रिका के अमृतं जलम् अभियान के तहत इस साल शहर में अभियान की शुरुआत का। अभियान के तहत श्रमवीरों ने करीब एक घंटे तक बावड़ी परिसर में साफ-सफाई कर श्रमदान किया तो लगा कि ऐतिहासिक बावड़ी 'मुस्कुराने' लगी है।
परशुराम द्वारा परिसर में चलने वाले राजकीय विद्यालय के स्टाफ और छात्राओं ने भी सफाई अभियान में सहभागिता दर्ज करवाई। सुबह की प्रार्थना के बाद छात्राओं ने शिक्षकों के साथ बावड़ी परिसर में जमा काई, मलबा और कचरा बाहर निकाला। इस दौरान मंदिर बलदेवजी के पुजारी कृष्ण शर्मा, विक्रम सिंह तंवर, दीपक धीर, पूर्णिमा भारद्वाज, ममता कुमारी और मुकेश सैनी समेत अन्य ने श्रमदान कर पसीना बहाया। इस दौरान निगम के एसआई राजेन्द्र मीणा और उनकी टीम की भी सक्रिय भूमिका रही।
परशुराम द्वारा परिसर निम्बार्क संप्रदाय के संतों की तपस्या स्थली के रूप में अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां स्थित बलदेव जी का प्राचीन मंदिर वर्षों से श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर परिसर में मौजूद इस ऐतिहासिक बावड़ी का निर्माण करीब 300 वर्ष पहले तत्कालीन महाराजा सवाई जयसिंह के शासनकाल में ‘राधाकुंड’ के रूप में करवाया गया था।
भू-तल से लगभग 11 मंजिल गहरी यह बावड़ी अपनी स्थापत्य शैली और जल संरक्षण क्षमता के लिए विशेष महत्व रखती है। खास बात यह है कि भीषण गर्मी के बावजूद इस बावड़ी में सालभर पानी भरा रहता है, जो इसे शहर की प्राचीन जल संरचनाओं में खास बनाता है।
पूर्व पार्षद भूपेंद्र मीणा ने कहा कि जल और प्राकृतिक स्रोतों को बचाने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पानी की कमी सबसे बड़ा संकट बनेगी, इसलिए जल स्रोतों का संरक्षण बेहद जरूरी है।
वहीं तालकटोरा एवं कदम्ब कुण्ड विकास समिति के अध्यक्ष मनीष सोनी ने कहा कि पत्रिका के अभियान से प्रदेशभर के ढेरों प्राचीन जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में मदद मिली है। मौके पर सभी ने 'जल है तो कल है', पानी बचाओ, जीवन बचाओ और हम सब ने मिलकर यह ठाना है, व्यर्थ बहते पानी को बचाना है' जैसे नारे लगाए गए।
Published on:
17 May 2026 08:19 am
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