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Patrika Raksha Kavach Impact : राजस्थान में थानों में साइबर हेल्प डेस्क की घोषणा और नया वॉट्सऐप नंबर किए गए जारी

Patrika Raksha Kavach Impact : साइबर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करने और ऐसे अपराधियों के खिलाफ पुलिस-प्रशासन की सुस्ती तोड़ने के मकसद से चलाए गए पत्रिका रक्षा कवच अभियान का राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में व्यापक असर हुआ।

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साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता अभियान। फाइल फोटो पत्रिका

Patrika Raksha Kavach Impact : जयपुर/ भोपाल/ रायपुर. साइबर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करने और ऐसे अपराधियों के खिलाफ पुलिस-प्रशासन की सुस्ती तोड़ने के मकसद से चलाए गए पत्रिका रक्षा कवच अभियान का राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में व्यापक असर हुआ। जनता के जागरूक होने से इन राज्यों में साइबर ठगी की घटनाओं में कमी आई। पुलिस, बैंकिंग और अन्य स्तरों पर लोगों को सतर्क करने के लिए भी ठोस प्रयास हुए। ऐसे प्रयास अभी जारी हैं और साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। रक्षा कवच अभियान के प्रभाव में कई ऐसे कदम उठाए गए जिसने साइबर अपराधों में कमी आने की आस बंधी है।

पत्रिका रक्षा कवच असर, 1930 नंबर की अब 27 लाइन हुईं

राजस्थान में शिकायत दर्ज कराने के लिए 1930 नंबर की अब 27 लाइन हो गई है जो पहले सिर्फ सात ही थी। पुलिस ने राज्य स्तर पर सभी थानों में साइबर हेल्प डेस्क की घोषणा और नया वॉट्सऐप नंबर जारी किया है। मध्यप्रदेश में ठगों के खातों को फ्रीज करने का प्रतिशत 9.34 से बढ़कर 23 फीसदी हो गया है। असर इससे समझा जा सकता है कि जहां 2024 में 285 करोड़ की ठगी के मामलों में सिर्फ 36.06 करोड़ रुपए फ्रीज किए गए थे, वहीं 2025 के शुरुआती चार महीनों में 251 करोड़ रुपए की ठगी में 60 करोड़ रुपए फ्रीज किए गए। छत्तीसगढ़ पुलिस ने 50 से ज्यादा साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। साइबर ठगों को बैंक खाता उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। 500 से अधिक संदिग्धों की भूमिका की जांची जा रही है।

हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तत्काल की शिकायत

साइबर सेल के अफसरों का कहना है कि लोग साइबर ठगी का शिकार होने के बाद शिकायत करने में देरी करते थे लेकिन पत्रिका ने व्यापक अभियान चलाकर बताया कि ठगी के बाद शुरुआती 30 मिनट गोल्डन आवर है। इस दौरान यदि शिकायत की तो ठगे गए रुपए बचाए जा सकते हैं। लोगों ने इसे अपनाया और हेल्पलाइन नंबर 1930 पर ठगी के तत्काल बाद शिकायत की।

राजस्थान में असर

1- साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन, देशभर की आइआइटी संस्थानों से 17 साइबर कमांडो तैयार हुए, इस वर्ष 50 कमांडो और मिल जाएंगे
2- जयपुर कमिश्नरेट में साइबर हेल्प डेस्क की शुरुआत की गई। पीएचक्यू में साइबर अपराध में मदद के लिए राज्य स्तरीय दो वाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9256001930 व 9257510100 शुरू की गई है।
3- साइबर अपराधियों की धरपकड़ के लिए ऑपरेशन साइबर शील्ड, ऑपरेशन स्पेशल ड्राइव चलाए गए। वर्तमान में ऑपरेशन म्यूल अकाउंट (किराए पर बैंक खाता देने वालों के खिलाफ कार्रवाई) चल रहा है।
4- पुलिस ने पहले सीएलजी सदस्य, सुरक्षा सखी व पुलिस मित्र को प्रशिक्षित किया। 9500 स्कूल, कॉलेज व अन्य संस्थाओं में जाकर 12.20 लाख लोगों को प्रशिक्षण देकर जागरूक किया।

राजस्थान ऑपरेशन साइबर शील्ड : ताबड़तोड़ कार्रवाई

1- 255 इस वर्ष जनवरी में एफआइआर दर्ज।
2- 540 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया।
3- 135 साइबर ठग पहले से वांटेड थे, जिन्हें गिरफ्तार किया गया।
4- 315 लोगों के खिलाफ साइबर अपराधियों की मदद करने पर निरोधात्मक कार्रवाई की।
5- 52000 मोबाइल सिम ब्लॉक करवाई गई।
6- 27000 मोबाइल हैंडसेट ब्लॉक करवाए।
7- 5200 चोरी के मोबाइल बरामद किए, इनमें 5000 मोबाइल पीडि़तों को लौटाए।
8- 8.90 करोड़ की ठगी की रकम को फ्रीज करवाया गया।

मध्यप्रदेश : 45 दिन में ही 1.10 करोड़ लौटाए

1- मिशन मनी बैकः साइबर सेल ठगी के पैसे वापस दिला रहा है। विदिशा पुलिस ने 10 मार्च से 25 अप्रेल 2025 तक 45 दिनों में ही 39 केसों में 1.10 करोड़ रुपए पीडि़तों के खाते में वापस दिलाए।

2- सेफ क्लिक अभियानः पुलिस के शीर्ष अफसरों से लेकर थानों तक ने शहर, गांव मोहल्लों में जागरूकता के लिए बताया कि किस लिंक पर कहां क्लिक करना है और कहां नहीं। इससे अपराध में गिरावट आई।

साइबर सेल ने उठाए तीन बड़े कदम

1- मिटिगेशन सेंटर को-ऑर्डिनेटर बनाए : अब शिकायतों पर रियल टाइम में सीधे दिल्ली से खातों को फ्रीज कराने की तैयारी। ऐसा करने वाला मप्र देश का 8वां राज्य बना।
2- स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप का गठन : फाइनेंशियल फ्रॉड के जल्द से जल्द निराकरण के लिए 6 सदस्यीय एसओजी का गठन किया। बैंक अफसरों से भी समन्वय, जरूरत पड़ने पर देशभर में मूवमेंट।