
जयपुर। राजधानी के अस्पतालों में रात में अचानक हड़कंप मच गया। प्रमुख चिकित्सा शिक्षा सचिव गायत्री राठौड़ बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे एसएमएस अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचीं। इमरजेंसी में सामान्य और गंभीर मरीज एक साथ लाइन में इंतजार कर रहे थे, जिनमें कुछ गंभीर मरीज दर्द से तड़पते दिखे। इस बदइंतजामी को देखकर राठौड़ ने मौके पर ही अस्पताल प्रशासन से साफ कहा कि यह सीधी लापरवाही है। उन्होंने तुरंत निर्देश देते हुए कहा कि इमरजेंसी में सामान्य और गंभीर मरीजों के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनाई जाए और गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार बिना देरी के मिले। इस दौरान एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ दीपक माहेश्वरी व अन्य मौजूद रहें।
उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि मरीजों की संख्या हर दिन बढ़ रही है और स्टाफ जस का तस है। यह व्यवस्था किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट आदेश दिया कि मानव संसाधन बढ़ाने की कार्रवाई तुरंत शुरू की जाए, ताकि बढ़ते मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। इमरजेंसी में सचिव ने नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा कि इतने भीड़भाड़ वाले कमरे में गंभीर मरीजों को कैसे बेहतर इलाज मिलेगा। उन्होंने तुरंत वार्डों को पुनर्गठित करने, अतिरिक्त भीड़ कम करने और गंभीर रोगियों के लिए अलग स्पेस तैयार करने के निर्देश दिए। इस दौरान राठौड़ ने मरीजों से भी बात की।
सचिव राठौड़ गणगौरी अस्पताल और महिला चिकित्सालय भी पहुंचीं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पतालों में साफ-सफाई की स्थिति और मेडिकल उपकरणों की हालत का भी बारीकी से निरीक्षण किया। कुछ वार्डों में सफाई में लापरवाही दिखी। इस पर सचिव ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि साफ-सफाई में लापरवाही मिली तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय है।
करीब दो घंटे तक चले इस औचक निरीक्षण के बाद सचिव ने साफ कहा कि ऐसे दौरे आगे भी जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि अस्पतालों की व्यवस्थाएं कागजों पर नहीं, जमीन पर सुधरनी चाहिए। मरीजों की परेशानी से खिलवाड़ अब किसी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। राठौड़ के इस सख्त रवैये के बाद तीनों अस्पतालों में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और स्टाफ में भी चौकसी बढ़ गई है।
Published on:
29 Nov 2025 12:02 pm
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