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क्यों दूर भाग रही हमारी पुलिस मोदी के फिटनेस मंत्र से

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जयपुर

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RAJESH MEENA

Jun 20, 2018

rajasthan police

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फुरसत नहीं तो कैसे सुधरे पुलिस की सेहत
थाना प्रभारी बोले—चौबीस घंटे की डयूटी में कैसे रहें फिट
जयपुर।
जयपुर शहर में कमिशनरेट के अधीन थानों में तैनात ५० पार उम्र के थाना प्रभारियों की सेहत की पडताल की गई तो चौंकाने वाले पहलू सामने आए। नफरी की कमी, चौबीसों घंटे काम के दवाब से जूझती पुलिस की सेहत में लगातार गिरावट आ रही है। थाना प्रभारी से लेकर अन्य पुलिसकर्मी चाह कर भी अपनी सेहत के लिए समय ही नहीं निकाल पा रहे है। काम से फुरसत मिले तो थाना पुलिस अपनी सेहत पर ध्यान दे पाए।
न्यूज टुडे की पडताल में सामने आया था कि कमिशनरेट के अधीन एक दर्जन से ज्यादा थानों की कमान ५० पार उम्र के थाना प्रभारियों के हाथों में है। इनमें से कई डायबिटीज, हदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों से भी पीडित है। न्यूज टुडे ने अपनी पडताल के दौरान थाना प्रभारियों से बात की तो सीधे तौर पर तो कुछ नहीं बोले लेकिन दबी जुबां से उनकी खराब होती सेहत का दर्द फूट ही पडा। थाना प्रभारियों का कहना था कि थाना इलाके में जनसंख्या लगातार बढती जा रही है, लेकिन इसी बीच नफरी की कमी होती जा रही है। सुबह से लेकर रात तक वीआईपी मूवमेंट, कोर्ट में तारीख, अनुसंधान, बडा अपराध हो जाए तो मौके पर जाना और फिर रात्रि गश्त के साथ दर्जन भर काम होते है। ऐसे में काम के बोझ के चलते सेहत की तरफ ध्यान उनका ध्यान ही नहीं जा पाता है।
शहर के अति व्यस्त थाने के थाना प्रभारी से बात की तो उनका कहना था काम का लगातार बढ रहा है। पहले फिट था लेकिन एक दिन जब जांच कराई तो पता चला कि डायबिटीज हो गई है। अब जैसे ही समय मिलता है तो खुद को फिट रखने की कोशिश करता हूं लेकिन कई बार तो ऐसी स्थिति हो जाती है कई दिनों तक न सही तरीके से सो पाता हूं और न ही खाना समय पर खा पाता हूं ऐसे में बीमारी तो होनी ही है।
शहर पुलिस की नफरी
राजधानी में कानून व्यवस्था के संचालन के लिए मौजूदा समय में पुलिस विभाग में सहायक आयुक्त पुलिस की स्वीकृत संख्या 42 के मुकाबले 36 ही मौजूद हैं। वहीं निरीक्षक स्वीकृत संख्या 132 के मुकाबले 119 ही हैं तथा उपनिरीक्षक की संख्या 606 के मुकाबले 391 ही हैं। वहीं सहायक उपनिरीक्षक की स्वीकृत संख्या 646 के मुकाबले 238 ही मौजूद हैं। वहीं हैड कांस्टेबल की स्वीकृत संख्या 1360 के मुकाबले 966 ही है। यही नहीं सिपाही की स्वीकृत संख्या 8896 के मुकाबले 8176 पुलिस कर्मियों की तैनाती है। जिनके कंधों पर राजधानी की करीब 40 लाख की आबादी की सुरक्षा का जिम्मा है। इनको थानों, पुलिस अधिकारियों के कार्यालय के विभिन्न प्रकोष्ठों में लगा रखा है।

ट्रैफिक विभाग में नफरी की स्थिति

लाखों की संख्या में दुपहिया-चौपहिया वाहनों की रेलमपेल और व्यवस्थित यातायात संचालन के लिए मशक्कत करने वाली ट्रैफिक पुलिस भी मैन पावर की कमी से जूझ रही है। वर्तमान में उपनिरीक्षक की स्वीकृत संख्या 45 के मुकाबले 43 की ही है। वहीं सहायक उपनिरीक्षक, मुख्य आरक्षी एवं आरक्षी की स्वीकृत संख्या 2038 के मुकाबले कुल 1176 पदों पर ही नफरी मौजूद है। यानी कि 862 पुलिसकर्मियों की संख्या रिक्त चल रही है। ऐसे में राजधानी की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करना ट्रैफिक पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है।