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Rajastha Cities : राजस्थान में अब शहरों का बदलेगा रूप, स्वायत्त शासन विभाग तैयार कर रहा है मास्टर प्लान

Rajastha Cities : राजस्थान के शहरों में नगरीय विकास को सुधारने के लिए स्वायत्त शासन विभाग की ओर से एक बार फिर मास्टर प्लान बनाने की कवायद शुरू की जा रही है। जानिए क्या हो रही है प्लानिंग?
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जयपुर

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Sanjay Kumar Srivastava

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Updated: 5 Mar 2026, 7:30 AM IST

Rajasthan cities will change their appearanc Autonomous Governance Department preparing a master plan

फोटो -AI

Rajastha Cities : राजस्थान के शहरों में अनियोजित तरीके से हो रहे नगरीय विकास को सुधारने के लिए स्वायत्त शासन विभाग की ओर से एक बार फिर मास्टर प्लान बनाने की कवायद शुरू की जा रही है। इसके तहत वर्ष 2023 से पूर्व बने शहरों (नवगठित निकाय) का मास्टर प्लान पहले बनेगा और उसके बाद में बाकी 66 शहरों का नम्बर आएगा।

जानकारी के अनुसार, टाउन प्लानिंग विभाग और स्वायत्त शासन विभाग ने इसी आधार पर काम शुरू कर दिया है। इन चयनित निकायों के मास्टर प्लान एक साल के भीतर तैयार किए जाएंगे। नवगठित 115 नगरीय निकायों में से पहले 49 का चयन करने का काम जल्द शुरू होगा।

मास्टर प्लान बनने के बाद इन शहरों में आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक क्षेत्रों, सड़कों, सार्वजनिक सुविधाओं और हरित क्षेत्रों का स्पष्ट निर्धारण किया जाएगा। इससे शहरी विकास को व्यवस्थित दिशा मिलने के साथ ही अनियोजित निर्माण पर भी रोक लग सकेगी।

पहले 196 शहरों का बना था मास्टर प्लान

पहले 196 शहरों के मास्टर प्लान बनाए गए थे। 13 शहरों के मास्टर प्लान की अवधि खत्म हो चुकी है। नया मास्टर प्लान बनाने तक इनकी अवधि बढ़ाई गई है। वर्ष 2023 में अनूपगढ़, पीलीबंगा, फलोदी, छबड़ा, अंता, सलूम्बर, कुशलगढ़, प्रतापगढ़, शाहपुरा, जयपुर, डीडवाना, खैरथल बड़ी और 2025 में जयपुर शहर का मास्टर प्लान एक्सटेंड किया जा चुका है

स्थानीय टाउन प्लानर व्यवस्था, आगे बड़ी परेशानी की आशंका

मास्टर प्लान नहीं होने से इन शहरों में अभी सबकुछ अस्थाई, कामचलाऊ तौर-तरीकों से चल रहा है। सड़क नेटवर्क तय करने से लेकर भू-उपयोग बदलने जैसे काम स्थानीय टाउन प्लानर की सिफारिश पर हो रहे हैं। ऐसे में गलत उद्देश्य से फैसले होने की आशंका बनी रहती है। मास्टर प्लान तैयार करते समय यदि कोई गड़बड़ी मिली तो बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। अव्यवस्थित शहरी विकास की आशंका बनी हुई है।

मास्टर प्लान इसलिए जरूरी

1- मास्टर प्लान शहर के विकास का पॉलिसी दस्तावेज है। इसमें पूरे शहर का विकास का वृहद प्लान शामिल है। मसलन, शहर के किस इलाके में भूउपयोग आवासीय, संस्थानिक, कॉमर्शियल होगा।
2- रोड नेटवर्क से लेकर परिवहन, मनोरंजन, आवास से जुड़ा खाका खींचा जाता है। इसमें इलाकेवार विकास का प्लान है।
3- जन सुविधा के लिए जगह आरक्षित की जाती है। इकोलोजिकल, हरियाली और पहाड़ी क्षेत्र के संरक्षण के लिए भी जगह चिन्हित होती है।

शहर के विकास की दिशा तय करता है मास्टर प्लान

मास्टर प्लान शहर के विकास की दिशा तय करता है। नवगठित नगरीय निकायों में स्थानीय परिस्थितियों आबादी की ज़रूरतें और भविष्य की चुनौतियां अलग-अलग है। यदि आम जान की राय तकनीकी संस्थानों की विशेषज्ञता और युवाओं की सोच को शामिल किया जाए।
एच. एस. संचेती, पूर्व मुख्य नगर आयोजन राजस्थान

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