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Cow Shelter: राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला, हर पंचायत में बनेगा “गौ माता आश्रय स्थल”

Cow Protection: निराश्रित गौवंश को मिलेगा सुरक्षित ठिकाना, चारागाह विकास योजना शुरू। गौ संरक्षण के साथ रोजगार और पर्यावरण सुधार की नई पहल, गौवंश संरक्षण की नई पहल: हर पंचायत में बनेगा आधुनिक आश्रय स्थल।

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जयपुर

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Rajesh Dixit

Apr 15, 2026

Cow breeders in Rajasthan

फोटो- राजस्थान पत्रिका

Gaushala Scheme: जयपुर. राज्य सरकार ने निराश्रित गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रदेशभर में व्यापक योजना शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत राज्य की 457 पंचायत समितियों की एक-एक ग्राम पंचायत में “पंडित दीनदयाल उपाध्याय चारागाह विकास आधारित गौ माता आश्रय स्थल” स्थापित किए जाएंगे। यह कदम न केवल गौवंश के संरक्षण की दिशा में अहम साबित होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती देगा।

पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि इन आश्रय स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाया जाएगा। यहां जल संरक्षण के तहत टांके और पक्की पानी की खेळ का निर्माण, वृक्षारोपण, चारागाह विकास, चारा भंडारण और कंपोस्ट खाद उत्पादन जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इससे गौवंश को प्राकृतिक और सुरक्षित वातावरण मिलेगा, साथ ही उन्हें पर्याप्त चारा और स्वच्छ पानी की सुविधा भी सुनिश्चित हो सकेगी।

योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार

इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार से भी जुड़ा है। आश्रय स्थलों पर किए जाने वाले जल संरक्षण कार्यों से भूजल स्तर में सुधार आएगा और स्थानीय स्तर पर हरित आवरण बढ़ेगा। साथ ही, कंपोस्ट खाद के उत्पादन से किसानों को जैविक खेती के लिए सस्ता और गुणवत्तापूर्ण विकल्प उपलब्ध होगा, जिससे कृषि लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि संभव होगी।
चारागाह विकास को गति देने के लिए राज्य में बीज बैंक की स्थापना पर भी जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में 150 बीज बैंक स्थापित किए जा चुके हैं, जिन्हें बढ़ाकर 300 करने का लक्ष्य रखा गया है। इन बीज बैंकों के माध्यम से देशी घास, चारा और वृक्षों के बीजों का संरक्षण एवं भंडारण किया जाएगा। इससे लुप्त हो रही वनस्पतियों का संरक्षण होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

ग्राम पंचायतें जल स्रोत, वन और वेटलैंड्स की सबसे बड़ी संरक्षक

इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान के महानिदेशक नीरज के. पवन ने कहा कि ग्राम पंचायतें साझा संसाधनों जैसे चारागाह, जल स्रोत, वन और वेटलैंड्स की सबसे बड़ी संरक्षक बन सकती हैं। “राजस्थान शामलात अधिवेशन 2026” के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि इन संसाधनों का संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन ग्रामीण आजीविका और पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कुल मिलाकर, यह योजना गौवंश संरक्षण, पर्यावरण सुधार और ग्रामीण विकास के समग्र दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम साबित हो सकती है।