
अशोक गहलोत और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा। फाइल फोटो- पत्रिका
जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव नहीं कराने के मुद्दे पर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए साफ कहा कि ऐसी स्थिति में राजस्थान सरकार को बर्खास्त किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर जारी बयान में गहलोत ने कहा कि चुनाव नहीं कराना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है और यह 'कांस्टीट्यूशनल ब्रेकडाउन' जैसा मामला है। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट तक इस पर अपनी बात स्पष्ट कर चुके हैं, फिर भी सरकार निर्देशों का पालन नहीं कर रही, तो यह गंभीर स्थिति है।
गहलोत ने कहा कि राज्यपाल और केंद्र सरकार को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को आगे आकर सुनिश्चित करना चाहिए कि चुनाव समय पर हों और लोकतांत्रिक व्यवस्था बनी रहे। उन्होंने आगे कहा कि ये संविधान की मूल भावना को चोट कर रहे हैं तो ये संविधान के ब्रेकडाउन की तरह है। इस सरकार को बर्खास्त करना चाहिए। अब बर्खास्त कौन करे? बर्खास्त करने वाले इनके पार्टनर हैं, डबल इंजन जो ये कहते हैं, एक बड़ा इंजन दिल्ली के अंदर है और वही बर्खास्त कर सकता है। ये उनके चहेते हैं तो इन लोगों को क्या बर्खास्त करेंगे। बर्खास्त करने लायक केस है ये।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार चुनाव से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल के बावजूद चुनाव कराए गए थे और हर हाल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखा गया था। गहलोत के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और सरकार पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।
इससे पूर्व अशोक गहलोत ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की ओर से परिसीमन को लेकर जताए रोष एवं आशंकाओं के मद्देनजर दक्षिण की चिंताओं को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। गहलोत ने बुधवार को जयपुर हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत में परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में उत्पन्न रोष को लेकर पूछे प्रश्न के जवाब में यह बात कही।
Updated on:
15 Apr 2026 05:24 pm
Published on:
15 Apr 2026 05:24 pm
