11 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

राजस्थान में गरमाई ‘मिर्जापुर कॉन्ट्रोवर्सी’, मोदी सरकार और सेंसर बोर्ड तक पहुंचा विवाद, जानें पूरा मामला

राजस्थान में 'मिर्जापुर' फिल्म को लेकर कॉन्ट्रोवर्सी जारी है। मेवाड़ राजपरिवार के पूर्व सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और सिंगर रैपरिया बालम के ऐतराज के बाद अब पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। जानें क्या है पूरा विवाद?
3 min read
Google source verification
rajasthan mirzapur movie controversy rajendra rathore letter mewar family

Rajendra Rathore and Lakshyaraj Singh Mewar reacts on Mirzapur Controversy

देशभर के सिनेमा थियेटर में हाल ही में रिलीज़ फिल्म 'मिर्जापुर- द मूवी' को लेकर एक कॉन्ट्रोवर्सी पिछले कुछ दिनों से राजस्थान में गरमाई हुई है। ये विवाद दरअसल, एक आपराधिक एवं गैंगस्टर चरित्रों के सीन्स के बैकग्राउंड में  उस  'शूरवीर' गीत के इस्तेमाल को लेकर है, जिसे राष्ट्र नायक और मेवाड़ के वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के त्याग, स्वाभिमान और हल्दीघाटी युद्ध की वीरता को समर्पित बताया जा रहा है। विवाद इतना ज़्यादा तूल पकड़े हुए हैं कि अब ये मामला केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के दरवाजे तक पहुंच गया है। 

राजस्थान विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने इस पूरे मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव और सेंसर बोर्ड के चेयरमैन को कड़ा पत्र भेजकर फिल्म से इस गीत और उससे जुड़े विवादित सीन्स को तुरंत हटाने या फिर फिल्म के प्रदर्शन पर ही रोक लगाने की मांग की है।  

इस पूरे विवाद ने राजस्थान में एक बड़े सांस्कृतिक और राजनीतिक आंदोलन का रूप ले लिया है। राजेंद्र राठौड़ ने स्पष्ट किया कि क्रिएटिव लिबर्टी या अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी भी फिल्म निर्माता को राजस्थान के गौरवशाली इतिहास और राष्ट्रीय नायकों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस विवाद में जहां पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने मोदी सरकार से कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है, वहीं मेवाड़ राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और मूल गीतकार 'रैपरिया बालम' भी अपनी कड़ी आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं।

'मुन्ना त्रिपाठी और गुड्डू भैया के सीन्स में चेतक का संदर्भ बर्दाश्त नहीं'

पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने 10 सितंबर 2026 को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म निर्माताओं की मंशा पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। राठौड़ ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि जिस 'शूरवीर' गीत की रचना महाराणा प्रताप जी, उनके स्वामिभक्त घोड़े चेतक और हल्दीघाटी के एतिहासिक बलिदान को नमन करने के लिए की गई थी, उसे फिल्म में मुन्ना त्रिपाठी और गुड्डू भैया जैसे काल्पनिक, महिला विरोधी और हिंसक चरित्रों की अश्लीलता व गैंगवार के दृश्यों के साथ दिखाया जा रहा है।

राठौड़ ने एक न्यूज़ एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा, "आज देश का हर नागरिक और युवा महाराणा प्रताप जी के नैतिक मूल्यों को अपनाता है। टेक्नोलॉजी और एआई के इस युग में अपनी विरासत को नीचा दिखाने की यह साजिश घोर निंदनीय है। मैंने सेंसर बोर्ड को 9 सितंबर और केंद्रीय मंत्री को 10 सितंबर को पत्र भेजकर आपत्तिजनक अंश हटाने की मांग की है। अगर जरूरत पड़ी तो देश का युवा अपनी ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगा।"

मेवाड़ राजपरिवार और सिंगर 'रैपरिया बालम' का भी ऐतराज

'मिर्जापुर- द मूवी' में महाराणा प्रताप के संदर्भों का दुरुपयोग किए जाने पर मेवाड़ राजपरिवार के सदस्य और पूर्व राजघराने से जुड़े लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने भी अपनी सख्त नाराजगी जाहिर की है। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि राजस्थान का इतिहास और महाराणा प्रताप का स्वाभिमान देश की धरोहर हैं, इसे किसी व्यावसायिक फायदे या बॉलीवुड फिल्मों के गैंगस्टर कल्चर को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं दूसरी ओर, 'शूरवीर' गीत के मूल रचयिता और राजस्थानी लोक गायक 'रैपरिया बालम' ने पहले ही यह खुलासा कर चुके हैं कि फिल्म में उनके देशभक्ति गीत का प्रयोग बिना उनकी अनुमति के किया गया है। उन्होंने कहा कि जिस गीत को उन्होंने राष्ट्र नायक के चरणों में समर्पित किया था, उसे नशेड़ियों और अपराधियों के चित्रण में चलाकर गीत की आत्मा को ठेस पहुंचाई गई है।

सेंसर बोर्ड के फैसले पर टिकी निगाहें

पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ द्वारा मोदी सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सीबीएफसी को लिखे गए आधिकारिक पत्रों के बाद अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। राजस्थान की जनता और सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि फिल्म से विवादित दृश्यों को तुरंत सेंसर किया जाए। यदि सेंसर बोर्ड और मंत्रालय इस दिशा में त्वरित कार्रवाई नहीं करता है, तो राजस्थान भर के सिनेमाघरों में इस फिल्म के प्रदर्शन का विरोध और तेज होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।