राजस्थान में सूखे बांधों का ठेका, बारिश पर टिकी आस

मानसून की देरी राजस्थान के हजारों मत्स्य पालकों पर भारी पड़ सकती है। बारिश की आस में पिछले महीने ही प्रदेश के सूखे बांध भी ठेके पर चले गए। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के कारण मत्स्य पालकों ने सूखे बांध ठेके पर लिए थे, उन्हें उम्मीद थी कि मानसून की झमाझम में बांध लबालब हो जाएंगे और जमकर मत्स्य पालन हो सकेगा।

By: Vinod Chauhan

Updated: 03 Jul 2021, 02:45 PM IST

विनोद सिंह चौहान/ जयपुर। मानसून की देरी राजस्थान के हजारों मत्स्य पालकों पर भारी पड़ सकती है। बारिश की आस में पिछले महीने ही प्रदेश के सूखे बांध भी ठेके पर चले गए। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के कारण मत्स्य पालकों ने सूखे बांध ठेके पर लिए थे, उन्हें उम्मीद थी कि मानसून की झमाझम में बांध लबालब हो जाएंगे और जमकर मत्स्य पालन हो सकेगा। लेकिन मानसून की बेरूखी ने मत्स्य पालकों के दिल की धड़कन बढ़ा दी है। यदि माससून की मेहर नहींं होती है तो इस सीजन मछली पालन को बड़ा झटका लगेगा और हजारों मत्स्य पालकों के सामने भूखे मरने की नौबत जाएगी। बड़ी बात यह है कि पिछले माह 19 बड़े बांध ठेके पर गए, जिसमें जयपुर जिले के दो सूखे बांध भी शामिल हैं।

मत्स्य पालकों की माने तो पिछले माह मौसम विभाग का पूर्वानुमान था कि राजस्थान में जमकर बारिश होगी। इसके चलते मत्स्य पालकों ने सूखे बांधों का ठेका ले लिया ताकि बांध भरने के बाद मछली पालन बेहतर होगा और पिछले साल कोरोना के दौरान हुए घाटे की भरपाई हो सकेगी। मानसून की दस्तक भी समय पर हुई, लेकिन झमाझम नहीं हो सकी। उधर, मौसम विभाग लगातार कहता आ रहा है कि मानसून में देरी बढ़ती जा रही है। ऐसे में मत्स्य पालकों की चिंता बढ़ती जा रही है। पानी कम रहा तो सीड कम डाली जाएगी और

राजस्थान मत्स्य पालक विकास संगठन के प्रदेशाध्यक्ष देवेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि हमने इस उम्मीद में सूखे बांध ठेके पर लिए हैं कि बारिश अच्छी होगी। मछली का बच्चा पालन हो जाएगा। प्रदेश में पिछले माह 17 जून को 19 बड़े बांधों को ठेके पर दिया गया। इसमें कई सूखे बांध भी ठेके पर गए। जिसमें जयपुर जिले का बुचारा, कानोता और छापरवाड़ा बांध भी शामिल है। बुचारा और छापरवाड़ा सूखे हैं। बुचारा 5 लाख 40 हजार और छापरवाड़ा 13 लाख 27 हजार में एक साल के लिए ठेके पर लिया है।

कानोता 90 लाख रुपए में ठेके पर गया है। कानोता में जलमहल का पानी जाता है, इसके चलते पानी दिखाई दे रहा है। इसके अलावा अलवर जिले में सूखा पड़ा जयसमंद बांध 5 लाख रुपए में ठेके पर गया। सीकर जिले में रायपुर पाटन 5 लाख 62 हजार में ठेके पर गया है, जो फिलहाल सूखा बांध है। टोंक में टोरड़ी सागर 25 लाख 81 हजार में ठेके पर गया, जो सूखा है। मत्स्य पालकों का कहना है कि पानी नहीं आएगा तो मस्त्य पालकों के पैसे डूबेंगे। उधर, सरकार की पालिसी में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।

अधिकतर बांध सूखने की कगार पर
राजस्थान में पिछले माह ही मानसून ने उपस्थिति दर्ज तो कराई, लेकिन मेहर नहीं बरसाई। उम्मीद तो यह थी कि जल्द ही बारिश से राजस्थान नहाएगा, लेकिन गर्मी अब तक कहर ढा रही है। मौसम विभाग की माने तो मानसून की सक्रियता के लिए प्रदेश को लगभग एक सप्ताह का इंतजार करना होगा। मानसून की आस लम्बी होती जा रही है और उधर, बांध सूखते जा रहे हैं। मत्स्य पालकों का कहना है कि बांध नहीं भरे तो उन पर कर्जे का बोझ जरूर बढ़ जाएगा। इसका असर अगले साल होने वाले ठेेके पर दिखाई देगा।

पिछले माह यह बांध ठेके पर गए

जलाशय का नाम----------------------वर्ष 2021-22 की नीलामी राशि
बुचारा------------------------------5 लाख 40 हजार
कानोता-------------------------------90 लाख 5 हजार
छापरवाड़ा-----------------------------13 लाख 27 हजार
जयसमंद-----------------------------5 लाख
रायपुर पाटन--------------------------5 लाख 6 हजार
टोरड़ी सागर--------------------------25 लाख 81 हजार
झाड़ोल------------------------------35 लाख 11 हजार
अरवड़------------------------------45 लाख 11 हजार
मानसरोवर झील-----------------------9 लाख 58 हजार
साबरमती त. कोटड़ा--------------------5 लाख 5 हजार
इंद्राणी-------------------------------5 लाख 5 हजार
बांक्या खाल--------------------------5 लाख 22 हजार
राजगढ़ मध्यम-----------------------25 लाख 25 हजार
बाबरा-------------------------------5 लाख 25 हजार
ओढामय नदी-------------------------10 लाख 51 हजार
ढीलटापुर चौथ का बरवाड़ा----------------20 लाख
पांचोलास----------------------------6 लाख 13 हजार
नीमझर-----------------------------6 लाख 23 हजार

Vinod Chauhan
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