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Dungri Dam : राजस्थान में रामजल सेतु लिंक परियोजना सियासी गणित में उलझी, डूंगरी बांध पर भी सस्पेंस बरकरार

Dungri Dam : राजस्थान में महत्वपूर्ण रामजल सेतु लिंक परियोजना सियासी गणित में उलझ रही है। सवाईमाधोपुर क्षेत्र में प्रस्तावित डूंगरी बांध को लेकर सरकार फिलहाल ‘सतर्क’ मोड में है। फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है।

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फोटो पत्रिका

Dungri Dam : राजस्थान में महत्वपूर्ण रामजल सेतु लिंक परियोजना सियासी गणित में उलझ रही है। सवाईमाधोपुर क्षेत्र में प्रस्तावित डूंगरी बांध को लेकर सरकार फिलहाल ‘सतर्क’ मोड में है। पहले हुए विरोध और गरमाई राजनीति के बाद अब हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है। आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव भी इसकी बड़ी वजह माने जा रहे हैं।सूत्रों के अनुसार सरकार नहीं चाहती कि राजनीतिक कारणों से परियोजना का यह अहम हिस्सा विवाद में आए, इसलिए अफसरों को फिलहाल इस पर धीमी गति से काम करने के संकेत दिए गए हैं। संभावना है कि चुनाव के बाद प्रक्रिया तेज हो।

बनास नदी पर प्रस्तावित बांध रणथंभौर और कैलादेवी वाइल्डलाइफ सेंचुरी की पहाड़ियों के बीच है, जिससे दोनों संरक्षित क्षेत्रों का हिस्सा प्रभावित होगा। खास यह है कि यहां ग्लोबल टाइगर फोरम की वाइल्ड लाइफ स्टडी पूरी हो चुकी है। 1588 एमसीएम क्षमता वाला यह बांध परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा। इसकी क्षमता बीसलपुर बांध से डेढ़ गुना ज्यादा है।

डिजाइन, अब 4387 मकान प्रभावित

बांध से जो 16 गांव प्रभावित होना संभावित बताया जा रहा है, उनमें 4387 मकान, भवन शामिल हैं। इनमें से 9 गांव ही ऐसे हैं, जिनकी आबादी 70 से 100 प्रतिशत तक प्रभावित होगी। पास में ही पुनर्वास की योजना बनाई गई है।

2017 में बनी सर्वे रिपोर्ट में ज्यादा गांव प्रभावित हो रहे थे, इसलिए इसका भराव तल 230 मीटर से घटाकर 227.50 मीटर और भराव क्षमता 2100 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) से घटाकर 1588 एमसीएम किया गया है।

सरकार को बतानी पडी़ थी स्थिति

डूंगरी बांध को लेकर पहले भारी विरोध हो चुका है। महापंचायत तक की गई। इसके बाद तीन मंत्रियों (जल संसाधन मंत्री, कृषि मंत्री और गृह राज्य मंत्री) को प्रेसवार्ता करनी पड़ी। इस दौरान पुनर्वास, मुआवजा और प्रभावितों के हितों को लेकर आश्वासन दिए गए। यही वजह है कि अब सरकार इस मुद्दे पर फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है।

दावा : ज्यादा नहीं, केवल 16 गांव प्रभावित

1- बनास नदी के किनारे स्थित गांव- बढ़ोलास, बाढ़ बिलोली, बिलोली नदी, भूरी पहाड़ी, तालेड़ा, भावपुर, डूंगरी, खिदरपुर जाडू।
2- मोरेल नदी किनारे प्रभावित गांव-सामोली, सांकड़ा, हाड़ौती, बड़ोडा।
3- सपोटरा नाले के किनारे-रूपपुरा, पदमपुरा, एकट और किराड़ी।

प्रोजेक्ट की समय सीमा बढ़ने की आशंका

पंचायत-निकाय चुनाव टलवाने के लिए सरकार हाईकोर्ट पहुंच चुकी है और दिसंबर तक चुनाव नहीं करा पाने की स्थिति बताई है। ऐसे में आशंका है कि प्रोजेक्ट में इस काम की समय सीमा बढ़ सकती है। ऐसा हुआ तो लागत भी बढ़ जाएगी।

राज्य के जल प्रबंधन के लिए अहम

रामजल सेतु लिंक परियोजना राज्य के जल प्रबंधन के लिए अहम है। डूंगरी बांध निर्माण प्रक्रिया आगे बढा़ रहे हैं। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, उचित मुआवजा और पर्यावरणीय संतुलन का पूरा ध्यान रखा गया है।
सुरेश सिंह रावत, मंत्री, जल संसाधन

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