
राजस्थान हाईकोर्ट। फोटो: पत्रिका
जयपुर/जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में लगातार हो रहे जानलेवा सड़क हादसों पर गंभीरता दिखाते हुए मंगलवार को केन्द्र और राज्य सरकार को संदेश दिया कि हम इस मामले पर मूकदर्शक नहीं रह सकते। जयपुर में जहां कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की बेंच ने गुरुवार को सुनवाई तय कर 48 घंटे में केन्द्र व राज्य सरकार का पक्ष पूछा है।
वहीं, जोधपुर में न्यायाधीश पुष्पेन्द्र सिंह भाटी की बेंच ने ‘राजस्थान पत्रिका’ की खबरों पर प्रसंज्ञान लेकर कहा कि पिछले दो हफ्ते में सौ से अधिक लोगों की सड़क हादसों में मौत अत्यंत चिंता की बात है। ऐसे हादसे उचित सावधानी और नियंत्रण से टाले जा सकते हैं। ऐसे में कोर्ट मूकदर्शक नहीं रह सकता, केन्द्र व राज्य सरकार बताए कि इन हादसों पर नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
जयपुर में एडवोकेट राजेंद्र शर्मा ने जानलेवा सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों व कानूनी प्रावधानों की ओर ध्यान दिलाया और कोर्ट से दखल का आग्रह किया। इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा व न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने केन्द्र और राज्य सरकार का पक्ष जानने के लिए याचिका की कॉपी अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास और राज्य के महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद को दिलाई है। वहीं, उनसे 6 नवंबर को सरकार को पक्ष रखने को कहा है।
कोर्ट ने जोधपुर में कहा कि मृत्यु निश्चित है, लेकिन अकाल मौत का दु:ख न केवल परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है बल्कि राष्ट्र की सामूहिक शक्ति में भी कमी लाता है। जिन जिम्मेदार संस्थाओं को सतर्क रहकर कार्य करना चाहिए, उनमें संवेदनहीनता दिख रही है। अब समय आ गया है, राष्ट्र इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे। यह समस्या केवल हादसे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिस्टम की व्यापक विफलता है, जिस पर तुरंत ध्यान दिया जाना जरूरी है।
Updated on:
05 Nov 2025 09:32 am
Published on:
05 Nov 2025 09:32 am
