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नौ वर्ष बाद परीक्षाः हमारे पांच लाख अभ्यर्थियों को झटका, बाहरी को फायदा

राज्य में नौ साल बाद स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट (सेट) परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। परीक्षा का सिलेबस देख कॉमर्स विषय के करीब पांच लाख अभ्यर्थियों को झटका लगा है।

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State Eligibility Test Examination in Rajasthan

विजय शर्मा/जयपुर। राज्य में नौ साल बाद स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट (सेट) परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। परीक्षा का सिलेबस देख कॉमर्स विषय के करीब पांच लाख अभ्यर्थियों को झटका लगा है। राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यायों में वाणिज्य तीन विषयों में कराई जा रही है।

बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, इकोनॉमिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड फाइनेंशियल मैनेजमेंट और अकाउंट्स एंड बिजनेस स्टेटिक्स में से एक विषय का चयन कर विद्यार्थी पीजी करते हैं। लेकिन सेट परीक्षा में कॉमर्स विषय का एक ही पेपर आएगा। इससे राज्य के अभ्यर्थियों को परीक्षा पास करने में मुश्किल होगी।

अभ्यर्थियों का तर्क है कि आरपीएससी की ओर से सहायक आचार्य भर्ती में कॉमर्स के तीन पेपर लिए जाते हैं। सेट में अलग से व्यवस्था क्यों अपनाई जा रही है। राज्य के कॉमर्स के अभ्यर्थी पेपर पास नहीं कर पाएंगे। बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को फायदा होगा। कारण है कि कई दूसरे राज्यों में कॉमर्स में पीजी एक ही विषय में कराई जाती है।

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इसीलिए हुई चूक, नेट को कॉपी किया
सरकार ने सेट परीक्षा आयोजन करने की जिम्मेदारी गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय को दी है। यूनिवर्सिटी ने सेट परीक्षा के सिलेबस के लिए यूजीसी से परीक्षा पैटर्न की जानकारी मांगी। यूजीसी ने नेट की तर्ज पर ही सेट कराने की स्वीकृति दे दी। खास बात है कि नेट में कॉमर्स को एक ही पेपर होता है। इसी आधार पर सेट परीक्षा का सिलेबस तैयार कर लिया गया है। इधर, राज्य सरकार के पास अधिकार होते हैं कि वह अपने राज्य के हिसाब से सिलेबस में बदलाव कर सकती है। लेकिन कॉमर्स विषय को लेकर अनदेखी कर दी गई।

सवाल : सेट और आरपीएससी में पैटर्न अलग-अलग क्यों
सेट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अभ्यर्थी आरपीएससी की ओर से आयोजित की जाने वाली सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में बैठते हैं। हैरानी की बात है कि सेट परीक्षा में तो कॉमर्स का एक ही पेपर आएगा। लेकिन सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में आरपीएसस की ओर से कॉमर्स के तीन अलग-अलग पेपर लिए जाते हैं। राज्य में भर्ती भी तीनों में अलग-अलग निकलती है। खास बात है कि पीएचडी भी तीनों विषयों में अलग-अलग होती है।

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हमने यूजीसी से मांग था पैटर्न
हमने यूजीसी से पैटर्न मांग था। नेट परीक्षा के आधार पर ही सिलेबस दिया गया है।
आईवी त्रिवेदी, कुलपति, गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय