
जयपुर। प्रदेशभर के स्कूलों के विद्यार्थी पाठयक्रम में बदलाव को लेकर परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि सरकार बदलने के साथ ही पाठयक्रम में बदलाव हुआ तो अब विद्यार्थियों को स्कूलों में किताबें ही नहीं मिली। ये किताबें स्कूलों में ग्रीष्मावकाश शुरू होने से पहले ही मिलनी थी, लेकिन अब ग्रीष्मावकाश के बाद जब स्कूल खुलेंगे तब ही मिल सकेंगी। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी भी परेशान हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि कभी किताबों में महाराणा प्रताप और अकबर को लेकर संशोधन किया जा रहा है तो कभी भारत के नक्शे में से कश्मीर ही गायब कर दिया जाता है, इससे विद्यार्थी परेशान हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा में यदि कोई प्रश्न आ जाए तो विद्यार्थी उसे कैसे हल करेंगे। इतना ही नहीं जौहर और सावरकर जैसे भी कई पाठों में संशोधन किया गया है। इससे पहले अलाउददीन खिलजी और पदमावती के पाठ में भी संशोधन किया गया।
कुछेक विद्यार्थी पुरानी किताबें पढ़ रहे हैं, वहीं कुछेक को नई किताबें मिलेंगी। ऐसे में विद्यार्थियों में एक भ्रम सा पैदा हो गया है कि कौनसी बात सही है और कौनसी गलत। स्कूलों में ग्रीष्मावकाश के बाद एक जुलाई से कक्षाएं शुरू होंगी। इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग और सरकार स्कूलों में 1 जुलाई से पाठयपुस्तकें देने की तैयारी कर रही है। लेकिन कई किताबें ऐसी हैं, जिसको लेकर विवाद थमता नहीं दिख रहा है, ऐसे में इन किताबों का मिलना मुश्किल ही होगा। इसके साथ ही भाजपा शासन में चल रही 4 किताबों को लेकर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है कि ये किताबें इस बार विद्यार्थियों को मिलेंगी भी या नहीं। इसके साथ ही कक्षा 9 से 12 की इतिहास और सामाजिक विज्ञान की भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। इन किताबों में विवाद के चलते फिलहाल इन्हें वितरण से रोक लिया है।