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एक करिश्माई खिलाड़ी, जिन्होंने अपने जज्बे से लिखी अपनी सफलता की इबारत

देवेन्द्र झाझड़िया एक करिश्माई खिलाड़ी हैं और इतनी ही दिलचस्प उनकी कहानी भी है।

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जयपुर

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Rajesh

Sep 27, 2017

Paraolympian Devendra Jhajharia

देवेन्द्र झाझड़िया एक करिश्माई खिलाड़ी हैं और इतनी ही दिलचस्प उनकी कहानी भी है। देवेन्द्र सिखाते हैं कि जिस्मानी तौर पर कमजोर होने के बावजूद हौसले के दम पर हम अपना मुकाम हासिल कर सकते हैं। शारीरिक अक्षमता से सफलता में कोई बाधा नहीं आती है। देवेन्द्र झाझरिया का खेल की दुनिया में और खासकर ओलम्पिक में जो नाम कमाया है, वो कई अन्य खिलाड़ी सोच भी नहीं पाए। देवेन्द्र का एक हाथ नहीं है, बचपन से दुःख तख़लीफ़ें झेलीं, लेकिन उसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी, देवेन्द्र में वो शक्ति है, जो उन्हें paraolympic के शिखर तक ले जाती है।

ये देवेन्द्र के व्यक्तित्व का ही प्रभाव है कि सही-सलामत लोग भी देवेन्द्र की कामयादी की हसरत रखते हैं और उनसे प्रेरणा लेने की बातें करते हैं। देवेन्द्र को देखकर उन्हें यकीन होता है कि राह मुशि्कल जरूर हो सकती है, लेकिन अगर जज्बा हो तो आसानी से कोई भी पहाड़ चढ़ा जा सकता है।


देवन्द्र का जन्म 10 जून 1980 को चूरू जिले में हुआ, वे एक भारतीय पैरालंपिक खिलाड़ी हैं| ये जेवेलिन थ्रो के पैरालंपिक में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पैरालिंपियन हैं। आठ वर्ष की उम्र में, एक पेड़ पर चढ़कर उन्होंने एक लाइव इलेक्ट्रिक केबल को छुआ था, जिससे उन्हें करंट लगा, जिसकी वजह से डॉक्टर को उनका बायां हाथ काटना पड़ा।

देवेन्द्र के कीर्तिमान-

1.2002 : देवेंद्र ने कोरिया में आयोजित आठवीं एफईएसपीआईसी खेलों में गोल्‍ड मेडल जीता.

2.2004 : एथेंस में भी इस स्‍पर्द्धा में गोल्‍ड जीत चुके हैं.

3.2004 : पहली बार एथेंस पैरालिंपिक खेलों के लिए क्‍वालीफाई किया.

4..2012 : पदम श्री से सम्‍मानित होने वाले देश के पहले पैरालिंपिक खिलाड़ी बने.

5.2013 : फ्रांस के लियोन में आयोजित आईपीसी एथलेटिक्‍स विश्‍व चैंपियनशिप में स्‍वर्ण पदक जीता.

6. 2014 :दक्षिण कोरिया में आयोजित एशियन पैरा गेम्‍स

7. 2015 : वर्ल्‍ड चैंपियनशिप में उन्‍होंने सिल्‍वर मेडल हासिल किया.

8..2016 :उन्होंने दुबई में 2016 आईपीसी एथलेटिक्स एशिया-ओशिनिया चैम्पियनशिप में एक स्वर्ण पदक जीता था

9..2016 :ग्रीष्मकालीन Paralympics में रियो डी जनेरियो में, उन्होंने पुरुषों के भाला फेंक F46 के आयोजन में स्वर्ण पदक जीता, अपने खुद के 2004 रिकॉर्ड को विश्व रिकॉर्ड रिकॉर्ड 63.97 मीटर के साथ फेंक दिया।

10.अर्जुन पुरस्कार (2004)

11.फिक्की पैरा- वर्ष के खिलाड़ी (2014)

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