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जयपुर। गुरु उदय होने के बाद 19 दिन से थमी शहनाइयों की गूंज 19 नवम्बर से फिर से सुनाई देंगी। 8 नवम्बर को गुरु उदय होने व शनिवार को बाल्यत्व समाप्त होने के बाद मांगलिक कार्यक्रमों का श्रीगणेश होगा। शहरभर में 19 नवम्बर से फिर से सडक़ों पर बैंड-बाजा-बारात की धूम रहेगी। इसके बाद से शादी विवाह, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, जनेऊ संस्कार जैसे मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
मलमास से फिर लगेगा मांगलिक कार्यों पर विराम
15 दिसम्बर को धनु मलमास लगने व शुक्र अस्त होने के साथ ही गलिक कार्यों पर फिर से विराम लग जाएगा। शुक्र का उदय 3 फरवरी को सुबह 9 बजे होगा। इसके बाद फिर से मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। इस बार शुक्र अस्त होने से जनवरी महीने में सिर्फ 22 जनवरी को बसंत पंचमी का अबूझ सावे पर ही मांगलिक कार्य हो सकेंगे। पंडित अक्षय शास्त्री के मुताबिक गुरु-शुक्र तारा अस्त होने पर धनु-मीन के मलमास और होलाष्टक होने के कारण विवाह के लिए अशुद्ध समय रहेगा। इसके बाद फिर 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक सूर्य के धुन राशि में होने से मलमास रहेगा। जिससे विवाह मुहूर्त नहीं होंगे।
25 दिन में केवल 13 विवाह मुहूर्त
इस बार नवम्बर में 19, 23, 24, 25, 28, 29 और 30। दिसंबर में 1, 3, 4, 10, 11 और 13। जनवरी में शुक्र के अस्त होने से केवल 22 जनवरी को बसंत पंचमी को सिर्फ अबूझ सावा का मुहूर्त रहेगा। इसके बाद 3 फरवरी को शुक्र उदय होने के बाद 7 फरवरी से फिर से मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे।
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Published on:
13 Nov 2017 01:56 pm
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