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Jaisalmer News- जैसलमेर के इस गांव में नहीं मिलता मीठा पानी, लाखों खर्च के बाद भी नहीं…

मीठे पानी के लिए खर्च लाखों का बजट बेकार! - फलोराइड युक्त पानी से निजात के लिए लगे यंत्र लम्बे समय से खराब - ग्रामीणों की परेशानी, जिम्मेदारों की अनदे
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जैसलमेर

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Jitendra Kumar Changani

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Updated: 27 Dec 2017, 10:45 AM IST

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जैसलमेर (फलसूण्ड) . आमजन को मीठा व शुद्ध पानी मुहैया करवाने के लिए गांवों में जीएलआर के पास लाखों की लागत से लगाए डी-फ्लोराइडेशन संयंत्र लम्बे समय से खराब हैं। इनकी मरम्मत नहीं होने से किए जा रहे सरकारी दावे झूठे साबित हो रहे हैं। गौरतलब है कि जलदाय विभाग ने वर्षों पूर्व जीएलआर के पास डी-फ्लोराइडेशन संयंत्र लगाए थे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में खारे व फ्लोराइडयुक्त पेयजल की समस्या का निराकरण हो सके। इसके बाद समय पर इनकी सारसंभाल नहीं होने से अधिकांश संयंत्र खराब पड़े है।
फैल रही बीमारियां
अनदेखी के चलते एक तरफ सरकार के लाखों की कीमत से लगे उपकरणों का उपयोग नहीं हो रहा है। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों के फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से उनमें कई रोग फैलने की आशंका है। इससे घुटनों व कमर में दर्द, उदर रोग सहित अन्य बीमारियां फैल रही है।
यहां खराब हैं डी-फ्लोराइडेशन संयंत्र
क्षेत्र में भीखोड़ाई, स्वामीजी की ढाणी, ताजाणियों की ढाणी, गोडागड़ा, फूलासर, मानासर, पारासर, फलसूण्ड सहित जीएलआरों के पास लगे डी-फ्लोराइडेशन संयंत्र लम्बे समय से बेकार हालत में हैं। ऐसे में ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बावजूद इसके जिम्मेदारों की ओर से कोई सकारात्सम कदम नहीं उठाया जा रहा है।

IMAGE CREDIT: patrika

सितोड़ाई में पेयजल किल्लत- पानी के अभाव में ग्रामीण व पशुपालक परेशान
ग्राम पंचायत सितोड़ाई में लम्बे समय से ग्रामीण व पशुधन पानी के लिए भटक रहे हैं। जानकारी के मुताबिक यहां दो ट्यूबवेल व पर्याप्त ऑपरेटर होने के बावजूद लोगों केा पानी नहीं मिल रहा। ग्रामीण व पशुधन सर्दी के मौसम में भी परेशानी झेल रहे हैं। ग्रामीण गोपालसिंह, जगमोहनसिंह, सज्जनसिंह, जसवंतसिंह, स्वरूपसिंह, खेतसिंह, प्रतापसिंह, काछबसिंह, मनोहरसिंह के अनुसार यहां गत एक साल से यही हालात हैं। जिम्मेदार कागजी कार्रवाई में ही व्यस्त रहते हैं। वहीं यहां लोगों को पानी के लिए छह किलोमीटर दूर तालाब से पानी लाना पड़ता है। गांव में करीब 120 घरों की बस्ती है। जिसमें 300 से अधिक गायें व 3000 से अधिक भेड़-बकरियां व अन्य पशुधन है। ऐसे में पानी के अभाव में इन्हें इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
यहां गहराया पेयजल संकट
जिले के सितोड़ाई क्षेत्र में स्थित काठोड़ा, मेघा, डिगड़ी, मेधा पार, लाखों की ढाणी, चान्दे की ढाणी, दाउ की ढाणी, सुमार की ढाणी, वृद्धसिंह की ढाणी, तोगे की ढाणी, ढालू की ढाणी, मोहब्बत की ढाणी, हजारसिंह की ढाणी, नई सितोड़ाई, पुरानी सितोड़ाई सहित आस-पास की ढाणियों में पेयजल संकट गहराया हुआ है। इससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एक साल से यही समस्या
गांव में लगभग एक साल से समस्या जस की तस है। कचरे से भरे पानी के कुण्ड पर पशुधन मंडराते रहते हैं।
- किशनसिंह, निवासी सितोड़ाई
नहीं हो रहा समाधान
गांव में दो ट्यूबवेल होने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा। कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत करवाने के बाद भी कोई हल नहीं निकल रहा।
- इस्माइल खान, निवासी डिगड़ी

IMAGE CREDIT: patrika