
जैसलमेर. सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सभी प्रदेश सरकारों को आतिशबाजी का समय तय करने के आदेश दिए है, जिसका असर जैसलमेर में भी देखने को मिल रहा। जैसलमेर में आतिशबाजी के समय निर्धारण को लेकर पटाखा व्यापारियों व विक्रेताओं में असमंजस का माहौल है, वहीं बच्चों व युवाओं में भी थोड़ी मायूसी है। पटाखा विक्रेताओं ने बताया कि समय निर्धारण के बाद लोग गत वर्षों की तुलना में इस वर्ष पटाखों की खरीददारी में कम रुचि दिखा रहे है। उन्होंने बताया कि पूर्व में धनतेरस से पूर्व ही बच्चों व युवाओं में पटाखे खरीदने व आतिशबाजी करने का उत्साह देखने को मिलता है, जो कि इस वर्ष कम देखा जा सकता है। शहर के डेडानसर मैदान में हर वर्ष पटाखों की अस्थायी स्टॉलें लगाई जाती है। इस वर्ष भी यहां गत वर्षों की तूलना में पटाखों की दुकानें कम देखने को मिल रही है।
10 बजे बाद ही करते है आतिशबाजी
पटाखे विक्रेताओं व खरीददारों का मानना है कि रात को लक्ष्मी पूजन आदि करने के बाद ही आतिशबाजी करने का समय होता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने रात 10 बजे तक ही पटाखे जलाने का समय निर्धारित किया है, जिसके चलते बच्चे व युवाओं में पटाखे खरीदने को लेकर उत्साह कम देखने को मिल रहा है। उनका मानना है कि 9 से 12 बजे तक समय का निर्धारण करना उचित रहता।
इस बार कम मंगवाए है पटाखे
पटाखों की बिक्री व बाजार में मंदी के दौर को देखते हुए हर वर्ष की तुलना में इस वर्ष पटाखे कम मंगवाए गए है। यदि पटाखों की मांग कम हुई तो उन्हें ओने-पोने दामों में बेचकर नुकसान झेलना पड़ सकता है।
-मेहताब अली, दुकानदार
दुकानों में इस वर्ष भीड़ काफी कम है। पटाखे जलाने को लेकर रात 8 से 10 बजे तक दो घंटे निर्धारित किए है। पटाखों की बिक्री पर प्रभाव पड़ेगा। इस वर्ष लोग पटाखे खरीदने व जलाने को लेकर कम उत्साहित है।
-हरिसिंह, पटाखा विके्रता
पर्व के मौके पर आतिशबाजी की समय सीमा निर्धारित करना ठीक है। हालांकि पटाखों की बिक्री प्रभावित हुई है। लोग इस बार पटाखों की खरीददारी कम कर रहे है। माल बचा तो घाटा हो सकेगा।
-अशोक गोस्वामी, पटाखा विक्रेता