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जैसलमेर. नगर निकाय चुनाव में इस बार मुकाबला सिर्फ प्रत्याशियों के बीच नहीं है, बल्कि राजनीतिक प्रभाव के पुराने नक्शे और नए वार्ड भूगोल के बीच भी है। परिसीमन ने कई वार्डों की सीमाएं बदली हैं। इसका सीधा असर उन राजनीतिक समीकरणों पर पड़ रहा है, जो वर्षों से मोहल्लों, परिवारों और पारंपरिक समर्थक समूहों के आधार पर बने हुए थे। अब जिस इलाके को कोई नेता अपना मजबूत जनाधार मानता था, उसका कुछ हिस्सा दूसरे वार्ड में चला गया है। वहीं दूसरे वार्ड का नया हिस्सा उसके लिए बिल्कुल नया राजनीतिक भूगोल बन गया है। यानी इस चुनाव में कई दावेदारों को पुराने वोट बैंक को बचाने के साथ नए मतदाताओं को जोड़ने की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
परिसीमन के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह है कि कई उम्मीदवारों का परिचित मतदाता समूह अब एक ही वार्ड में केंद्रित नहीं रहा। पारंपरिक समर्थक अलग-अलग वार्डों में चले गए हैं। ऐसे में उम्मीदवार पुराने व्यक्तिगत संपर्क को नए इलाकों तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।
-पुराने वार्ड की सीमाएं अब राजनीतिक प्रभाव की गारंटी नहीं
-परिवार आधारित समर्थन कई जगहों पर बिखरा
-नए मतदाताओं के साथ पहली बार सीधा संपर्क जरूरी
-स्थानीय मुद्दों की प्राथमिकता वार्ड बदलने के साथ बदल सकती है
नए परिसीमन ने उम्मीदवारों के सामने केवल क्षेत्र बढ़ाने या घटाने की चुनौती नहीं रखी, बल्कि मतदाता प्रोफाइल को नए सिरे से समझने की जरूरत पैदा की है। किस इलाके में कौन-सा सामाजिक समूह निर्णायक है, किस मोहल्ले का स्थानीय मुद्दा क्या है और किन परिवारों का प्रभाव है—इन सवालों के जवाब अब पुराने चुनावी अनुभव से नहीं मिल रहे। यही वजह है कि दावेदार घर-घर संपर्क, छोटे समूहों में बैठक और व्यक्तिगत नेटवर्क मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। सोशल मीडिया की पहुंच के साथ जमीनी संपर्क का महत्व भी बढ़ गया है।
परिसीमन का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि कुछ प्रभावशाली परिवारों और स्थानीय राजनीतिक नेटवर्क का प्रभाव अब एक ही वार्ड तक सीमित नहीं दिखाई देता। उनके रिश्तेदार, समर्थक और व्यक्तिगत संपर्क अलग-अलग वार्डों में होने से उनकी राजनीतिक भूमिका बहु-वार्ड हो सकती है।
इससे चुनाव में सीधे प्रत्याशी से ज्यादा 'नेटवर्क बनाम नेटवर्क' का मुकाबला दिखाई देने की संभावना है। एक प्रत्याशी का व्यक्तिगत जनाधार दूसरे वार्ड में किसी दूसरे दावेदार के लिए भी राजनीतिक संसाधन बन सकता है।
परिसीमन को केवल वार्ड की सीमा बदलने की प्रशासनिक प्रक्रिया मानना पर्याप्त नहीं है। इसका असर स्थानीय नेतृत्व, समर्थक समूहों, जातीय-सामाजिक समीकरणों और व्यक्तिगत संपर्कों तक जाता है। पुराने मजबूत इलाके का कुछ हिस्सा निकलने से उम्मीदवार का आधार कमजोर हो सकता है, लेकिन नए इलाके में मजबूत पकड़ बनाने पर वही प्रत्याशी अपना प्रभाव क्षेत्र पहले से बड़ा भी कर सकता है।
-डॉ. नरेश पुरोहित, राजनीतिक विश्लेषक
Updated on:
30 Aug 2026 08:11 pm
Published on:
30 Aug 2026 08:11 pm
