5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जैसलमेर जिले में हर छठे कैंसर रोगी की मौत,जागरुकता की कमी लील रही जिंदगी

विश्व कैंसर दिवस आज....  
2 min read
Google source verification
jaisalmer

जैसलमेर जिले में हर छठे कैंसर रोगी की मौत,जागरुकता की कमी लील रही जिंदगी

लालसिंह सोलंकी@जैसलमेर. सीमावर्ती जैसलमेर जिले में कैंसर जैसी भयावह बीमारी पर भी उदासीनता इंसानी जिंदगी पर भारी पड़ रही है। जागरुकता की कमी के चलते जिले में हर छठा मरीज दम तोड़ रहा है। वर्ष 2017 के सितंबर माह से अब तक 190 कैंसर पीडि़तों के मामले सामने आए। जिनमें से करीब 30 मरीजों की मौत हो गई। अधिकांश कैंसर पीडि़त बीमारी की अंतिम स्टेज में उपचार कराने पहुंचते हैं। जिले में मुख्यतया मरीज मुंह के कैंसर से पीडि़त हैं।

जिला अस्पताल में उपचार की सुविधा
जानकारी के अनुसार सितंबर 2017 में जिला अस्पताल में कैंसर केयर यूनिट की स्थापना की गई। जिसमें कैंसर पीडि़तों का फॉलोअप कीमोथैरेपी के माध्यम से उपचार किया जाता है। यूनिट में एशियन कैंसर इंस्टीट्यूट मुंबई से प्रशिक्षण प्राप्त चिकित्सक उपचार करते हैं। इस दौरान मेडिकल कॉलेज से प्रदत्त दवाइयां भी निशुल्क उपलब्ध की जाती है। इससे पहले कैंसर के मरीजों को उपचार के लिए जोधपुर, बीकानेर, जयपुर, अहमदाबाद, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों तक जाना पड़ता था।
क्या है कैंसर की वजह
कैंसर की वजह अलग-अलग होती है। आजकल गुटखा, शराब, सिगरेट आदि मादक पदार्थों के सेवन के बढते प्रचलन, प्लास्ेिटक निर्मित सामग्री उपयोग में लेने, खान-पान में बदलाव, केमिकल युक्त मिलावटी खाद्य आदि से लोग इस भयानकर बीमारी की चपेट में आते हैं।
खतरनाक है यह उदासीनता
आम धारणा यही है कि कैंसर के रोगी की जान नहीं बचती। लेकिन समय पर उपचार लेने से कैंसर के रोगी पूरी तरह से ठीक होकर आम जिंदगी जी सकते हैं। पहली स्टेज में कैंसर पकड़ में आ जाने से दवाई, सर्जरी दोनों काम कर जाती है। लेकिन आखिरी स्टेज पर इलाज आमतौर पर कामयाब नहीं हो पाता। ऐसे में कैंसर से भय की जगह जन जागरुकता बेहद जरूरी है।

फैक्ट फाइल -
- 190 मामले अब तक सामने आए
- 30 मरीजों की अब तक हो चुकी मौत
- 2017 में कैंसर केयर यूनिट की शुरुआत

डटकर करें मुकाबला
कैंसर का बेहतर इलाज तभी संभव है जब उसका इलाज प्रारंभिक तौर पर शुरू हो जाए। ऐसे में जागरूक रहने की जरूरत है। सामान्य दिक्कत होने पर भी चिकित्सक से परामर्श लें। मरीज और उसके परिजनों को कमजोर नहीं पडऩा चाहिए और इस बीमारी का डटकर मुकाबला करना चाहिए।
- डॉ. वीके वर्मा, जिला कैंसर नोडल अधिकारी, जैसलमेर