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साल-दर-साल बढ़ रहा पर्यटकों में राजस्थान के इस नायाब शहर का क्रेज, यहां सैलानियों को मिलता है सुकून

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jaisalmer

जैसलमेर। देश की पश्चिमी सीमा के अंतिम छोर पर बसा ऐतिहासिक jaisalmer शहर देशी-विदेशी सैलानियों के लिए सबसे सुकूनदायी स्थल बनने की ओर अग्रसर है। यही कारण है कि यहां पर्यटकों की आवक का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। साढ़े आठ सौ साल से ज्यादा प्राचीन इस शहर में सैलानियों को लुभाने वाली सभी खासियतें मौजूद हैं। तभी आम से लेकर खास सभी श्रेणी के देशी-विदेशी सैलानी कम से कम एक बार इसका दीदार अवश्य करना चाहते हैं। 80 के दशक से जैसलमेर में पर्यटन की विधिवत शुरुआत हुई और आज यह परवान चढ़ चुका है। प्रतिवर्ष यहां लाखों की संख्या में घरेलू और सात समंदर पार के सैलानी पहुंच रहे हैं। उन्हें यह शांत शहर ‘घर से दूर एक और घर‘ जैसा ही प्रतीत होता है।

नायाब विरासत
जैसलमेर घूमने आने वाले सैलानियों को यहां सदियों पुरानी विरासत आज भी जीवंत रूप में नजर आती है। सोनार दुर्ग में हजारों की आबादी का बसेरा उनके लिए किसी अजूबे से कम नहीं होता। रेगिस्तानी क्षेत्र में गड़ीसर जैसा कलात्मक सरोवर, पीले पत्थर पर बेजोड़ नक्काशी वाली पटवा हवेलियां और अन्य इमारतें, दुर्ग तथा लौद्रवा के प्राचीन जैन मंदिर, कुलधरा व खाभा में पालीवाल समाज की धरोहरों से लेकर सम तथा खुहड़ी के बालुई मिट्टी के लहरदार धोरे पर्यटकों को खो जाने के लिए मानो विवश कर देते हैं। इतनी सियतें किसी एक पर्यटन स्थल पर अन्यत्र देखना दुर्लभ होता है। थोड़ा अलग हटकर देखें तो जैसलमेर में लाखों साल पहले के जीवाश्म और सरस्वती नदी का बहाव क्षेत्र मानव सभ्यता के साथ जीव जगत के अनखुले अध्यायों को अपने में समाहित किए हुए हैं।

पर्यटन ने पलटी किस्मत
पिछले चार दशक के दौरान बढ़े-चढ़े पर्यटन ने हर क्षेत्र में पिछड़े और कोई सौ साल तक अलग-थलग रहे जैसलमेर तथा यहां के बाशिंदों की किस्मत को बदल दिया है। कोई जमाना था जब अकाल व सूखे की मार झेलते हुए यहां के मूल निवासी रोजी-रोटी के लिए राजस्थान के अन्य शहरों के साथ देश के दूसरे प्रांतों का रुख करते थे। लेकिन पिछले चार दशकों में समय का पहिया ऐसा पलटा कि आज लोग बाहर से रोजगार के लिए जैसलमेर आकर बस रहे हैं। पर्यटन के बिना धुएं वाले उद्योग ने जैसलमेर की खुशबू को कहां से कहां पहुंचा दिया, इसकी बानगी यहां के बुजुर्गों की यादों में पैबस्त है।

250 से ज्यादा होटलें
सम-खुहड़ी में 100 से ज्यादा रिसोट्र्स, 200 से अधिक रेस्टोरेंट्स के अलावा सैकड़ों की तादाद ट्रेवल एजेंसियां, हैंडीक्राफ्ट की दुकानों व अन्य व्यवसायों के साथ हजारों की तादाद में लोग पर्यटकों के लिए विविध सेवा कार्यों में रोजगार पा रहे हैं। इसके चलते जैसलमेर का पर्यटन व्यवसाय आज 1200 करोड़ रुपए सालाना तक पहुंच गया है।