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मिटटी के खिलौनों से छीना रंग,रोजगार छीनने का सत्ता रहा भय

खतरे में पोकरण पोट्स का व्यवसाय!- कुंभकार समाज ने रिण क्षेत्र में 100 बीघा भूमि आरक्षित करने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन-सौैर ऊर्जा कंपनी को भूमि आवंटित कर दिए जाने से नहीं मिल रही है लाल मिट्टी
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jaisalmer

मिटटी के खिलौनों से छीना रंग,रोजगार छीनने का सत्ता रहा भय

जैसलमेर /पोकरण. पोकरण क्षेत्र के लवां ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित रिण क्षेत्र में सौर ऊर्जा उत्पादन कंपनी को भूमि आवंटित कर दिए जाने से लवां व आसपास क्षेत्र के कुंभकारों में रोष है। उन्होंने रोजगार का संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई है। गौरतलब है कि पोकरण उपखण्ड क्षेत्र की लवां ग्राम पंचायत में खसरा संख्या 647 में सैंकड़ों भूमि स्थित है। जिसे स्थानीय भाषा में रिण क्षेत्र कहा जाता है। यहां बारिश के दौरान लम्बे चौड़े भू-भाग पर पानी जमा होता है। जिससे यहां लाल मिट्टी एकत्र होती है। यह मिट्टी चिकनी होती है, जो मिट्टी के बर्तन, खिलौने आदि बनाने के काम में ली जाती है।
सैंकड़ों परिवार जुड़े है मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाने के व्यवसाय से पोकरण व लवां गांव के पास स्थित रिण क्षेत्र की चिकनी मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाकर देश विदेश के विभिन्न बाजारों में बेचने से कुंभकार समाज के सैंकड़ों परिवार अपना जीवनयापन करते है। मिट्टी के बर्तन रिण की चिकनी मिट्टी से ही बनते है, क्योंकि इसमें रेत की मात्रा कम होती है। पोकरण, फलोदी, देचू, शेरगढ़, कानोडिया, लोहावट क्षेत्र के करीब तीन हजार से अधिक परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हुए है। इस लाल मिट्टी की खुदाई कर उसे घर लाने, उसे छानकर व कई दिनों तक पानी में भिगोकर और अधिक चिकनी बनाकर मिट्टी के आकर्षक खिलौने व बर्तन बनाने के काम से अपनी रोजी रोटी चलाते है।
रोजी रोटी को बचाने की लगाई गुहार
पोकरण व लवां रिण क्षेत्र के आसपास निवास कर रहे करीब एक दर्जन गांवों के कुंभकार समाज के लोगों ने जिला कलक्टर को ज्ञापन प्रेषित कर बताया कि लवां ग्राम पंचायत के खसरा संख्या 647 में स्थित रिण क्षेत्र से मिट्टी खुदाई कर तथा बर्तन व खिलौने बनाकर पीढिय़ों से उनके परिवार जीवनयापन कर रहे है। रिण क्षेत्र में स्थित 2383 बीघा भूमि को सौर ऊर्जा कंपनी को आवंटित किया गया है तथा कंपनी की ओर से यहां संपूर्ण भूमि पर चारदीवारी का निर्माण करवाया जा रहा है। कंपनी की ओर से यहां अब मिट्टी खुदाई नहीं करने दी जा रही है। ऐसे में मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाकर बेचने का उनका व्यवसाय हमेशा के लिए बंद होने व उनके लिए रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने रिण क्षेत्र में स्थित करीब 100 बीघा भूमि कुंभकार समाज के लिए आरक्षित करने की मांग की है, ताकि वे यहां से मिट्टी ले जाकर अपना व्यवसाय चालू रखकर अपना गुजर बसर कर सके।