
‘परम्पराओं को जीवित रखने के लिए मानवीय मूल्यों की जरूरत’
जैसलमेर. हमारी परम्पराओं को जीवित रखने के लिए कई मानवीय मूल्यों की आवश्यकता होती है, जिसमें भाइचारा, सहनशीलता, बहुपरम्परावादी प्रमुख है । ये उद्गार प्रधानाचार्य नवलकिशोर गोयल ने व्यक्त किए। वे राष्ट्रीय एकता सप्ताह के अवसर पर अमर शहीद सागरमल गोपा उच्च माध्यमिक विद्यालय जैसलमेर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। अल्पसंख्यक अधिकारी उम्मेदसिंह ने कहा कि कोई भी जाति, धर्म के लोग हो सभी भाई-भाई है। क्षेत्र, वेषभूषा व खान-पान के अधार पर हम भेदभाव न करे। ऐसी हमारी सांचव मंशा होनी चाहिए। इसी अवसर पर मुख्य वक्ता हिन्दी व्याख्याता केसरसिंह राठौड़ ने कहा कि ‘भाषाओं के सामंजस्य से भी संास्कृतिक एकता का निर्माण होता है, अत: प्रेम व भाइचारे को अपनाकर ही जीवन निर्वाह करने की जरूरत है। साहित्यिक चर्चा के तहत विज्ञान वर्ग के छात्र हर्षित केवलिया ने साहित्य को संवाद की श्रेष्ठ विद्या बताते हुए कविता पाठ, सुरदास के पदों का वाचन किया। हिन्दी व्याख्याता दिनेश गोपा ने सांप्रदायिक सौहार्द को बढाने का संदेश देते हुए अपनी बात कही। कार्यक्रम के तहत गोविन्द गर्ग, अशोक ओझा, आरती मिश्रा, उषा जोषी ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन करत व्याख्याता नरेन्द्र वासु ने कौमी एकता व राष्ट्रीय सद्भावना को अपनाने की बात पर बल दिया। व्याख्याता डॉ. घनश्याम गोस्वमी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
शैक्षणिक भ्रमण के लिए रवाना
मोहनगढ. कस्बे में स्थित मरूस्थली महिला विद्यापीठ उच्च माध्यमिक विद्यालय से गुरूवार को शैक्षिक भ्रमण के लिए विद्यार्थियों का 101 सदस्यीय दल जैसलमेर के लिए रवाना हुआ। प्रधानाचार्य राणा राम सुथार व शिक्षक उम्मेद सिंह तंवर ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। दल के सदस्यों ने काला डूंगर राय माता मंदिर, वार म्यूजियम, स्वर्ण दुर्ग, गड़ीसर तालाब, हवेलियां, मंदिर, कुलधरा, चूंधी गणेश मंदिर, सहित विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया । दल में शिक्षक प्रेम सिंह भाटी, उम्मेद सिंह तंवर, शिक्षिका अंशु व छात्र -छात्राएंं शामिल रही ।
Published on:
23 Nov 2018 05:57 pm
