2 नवंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

JAISALMER NEWS- चाय बनाने वाले पिता के इस पुत्र ने बडे भाई की मौत के बाद लिया इतना बडा संकल्प और बन गया आईएएस

महज 24 वर्ष की उम्र में आईएएस बनने वाले होनहार ने दिया विद्यार्थियों के लिए बड़ा संदेश, राजस्थान पत्रिका के साथ खास बातचीत में देशलदान ने बांटे अनुभव
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जैसलमेर

•

image

Jitendra Kumar Changani

•

Updated: 1 May 2018, 12:10 PM IST

Jaisalmer patrika

patrika news

देशलदान के लिए भाई की मौत के गम से बड़ी साबित हुई उसकी प्रेरणा
जैसलमेर. यूनियन चौराहा पर चाय की दुकान चलाने वाले ‘बारहठजी’ यानी कुशलदान के छोटे बेटे देशलदान की सफलता के डंके आज पूरे देश में बज रहे हैं। महज 24 वर्ष की आयु में सबसे प्रतिष्ठित सरकारी सेवा आईएएस में चयनित होने वाले देशलदान की इस सफलता का राज उनके नेवी में चयनित होने वाले भाई की प्रेरणा है।कुशलदान के बड़े बेटे कूपदान नौ सेना में चयनित होकर देश की रक्षा के लिए घर से निकले थे। वे हमेशा देशलदान को आईएएस बनने के लिए प्रेरित करते थे। काल की क्रूरता ही कहिए कि, वर्ष 2010 में पनडुब्बी में हुए एक हादसे में होनहार कूपदान की दर्दनाक मौत हो गई।पूरे परिवार के साथ देशलदान पर भी दु:खों का पहाड़ टूट गया। लेकिन देशलदान ने भाई की मौत के गम को उनकी प्रेरणा पर हावी नहीं होने दिया बल्कि स्वयं के लिए देखे गए उनके सपने को साकार करने का वज्रसंकल्प ले लिया। आज नतीजा सबके सामने है। वर्तमान में दिल्ली प्रवास पर देशलदान के साथ रविवार को राजस्थान पत्रिका ने दूरभाष पर विशेष बातचीत की। जिसमें उन्होंने अपनी सफलता के लिए सहायक तत्वों के संबंध में खुलकर चर्चा की।
पहले प्रयास में हासिल सफलता
देशलदान को सबसे कठिन मानी जाने वाली भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में पहले प्रयास में ही 82वीं रैंक हासिल हो गई और उनका आईएएस बनना सुनिश्चित हो गया है। देशलदान ने इसी वर्ष फरवरी माह में आई्रएफएस में चयनित होने का कारनामा भी पहले प्रयास में किया था और उसके दो माह बाद आईएएस में भी। आगामी मई माह में 24 वर्ष के होने जा रहे देशलदान मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित कॉलेज से इंजीनियरिंग का बीटेक का कोर्स किया हुआ है।

IMAGE CREDIT: patrika

माध्यमिक स्कूल के रहे टॉपर
ग्रामीण परिवेश से ताल्लुक रखने वाले जैसलमेर शहर में साधारण परिवार के छात्र देशलदान ने दसवीं की बोर्ड परीक्षा स्थानीय राजकीय माध्यमिक विद्यालय से 91 प्रतिशत से अधिक अंकों से उत्तीर्ण की और स्कूल के टॉपर बने। उसके बाद वे आगे पढ़ाई के लिए कोटा चले गए, जहां से उन्होंने 11वीं व 12वीं की पढ़ाई की तथा बीटेक की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर बाद में इंजीनियर बन गए, लेकिन आईएएस बनना ही उनका सपना था। जिसे उन्होंने साकार कर दिखाया। उनके माता-पिता गवरी देवी और कुशलदान हालांकि आईएएस होने का महत्व ज्यादा नहीं समझते, लेकिन देशलदान को इस लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए अपना पूरा समर्थन व आशीर्वाद दिया।
जागरुक बने युवा
स्मार्ट फोन और सोशल प्लेटफार्म पर हमेशा सक्रिय रहने वाले युवाओं को जीवन में आगे बढऩे की प्रेरणा देने के लिए देशलदान का संदेश बेहद स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने आसपास के माहौल के प्रति जागरुक रहना चाहिए। सोशल मीडिया पर युवा सक्रिय भले ही रहें, उन्हें उसका सदुपयोग करने की तरफ ध्यान केंद्रित करना चाहिए। किताबें तो पढ़ाई में सहायक होती ही हैं, समाचार पत्र-पत्रिकाओं का नियमित अध्ययन बहुत काम आता है।उन्होंने बताया कि पढ़ाई का समय सभी प्रतियोगियों की अपनी-अपनी क्षमता पर निर्भर करता है लेकिन एकाग्रता के साथ पढ़ाई व जीवन में अनुशासन अत्यंत जरूरी है।
चाय पर होती है देशलदान की चर्चा
यूनियन चौराहा स्थित कुशलदान की चाय की दुकान अब उनके सबसे बड़े बेटे शिवदान चलाते हैं।वहां दिनभर आने वाले ग्राहक अब चाय की चुस्की के साथ देशलदान की सफलता पर चर्चा करते हैं तो शिवदान का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।शिवदान के अनुसार देशलदान सादा जीवन में विश्वास करते हैं और उनके पास अभी हाल तक एंड्रॉयड फोन तक नहीं था।