
मरुस्थल के तपते धोरों के बीच बसे जैसलमेर जिले के नाचना क्षेत्र की देवड़ा की ढाणी में शिक्षा का दीप जलाने का काम युवा शिक्षक विकास भूकर कर रहे हैं। वर्ष 2019 में तृतीय श्रेणी अध्यापक के रूप में चयनित होकर पहली नियुक्ति इसी विद्यालय में मिली। गांव पहुंचकर उन्हें पता चला कि यहां तक कोई बस या वाहन सुविधा उपलब्ध नहीं है। नाचना से विद्यालय की दूरी 25 किलोमीटर है और रास्ता पूरी तरह रेतीला। पहले दिन ग्रामीण के निजी वाहन से पहुंचे तो देखा— विद्यालय के पास न पानी की व्यवस्था, न नेटवर्क की सुविधा। विद्यालय में नामांकन मात्र 60 था। आसपास के ग्रामीण शिक्षा से दूर थे और अधिकांश बच्चे भेड़-बकरियां चराने में लगे रहते थे। भूकर ने विद्यालय समय के बाद ढाणियों में जाकर ग्रामीणों से संवाद शुरू किया, उन्हें शिक्षा का महत्व समझाया और बच्चों को विद्यालय भेजने का आग्रह किया। निरंतर प्रयासों से बच्चों का विश्वास बढ़ा और नामांकन 96 तक पहुंच गया। राष्ट्रीय पर्वों पर अभिभावकों से मिले सहयोग से विद्यालय में संसाधन जुटाए गए। आज बच्चे स्मार्ट टीवी पर पढ़ाई कर रहे हैं और खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। विद्यालय में शिक्षा का वातावरण बदल चुका है।रेगिस्तान की चुनौतियों के बावजूद विकास भूकर का संकल्प है कि शिक्षा की अलख को हर ढाणी तक पहुंचाकर बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाया जाए।
Published on:
04 Sept 2025 09:16 pm
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