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विश्व मौसम विज्ञान दिवस-सटीक आंकलन से आपदाएं होगी बेअसर,भू विज्ञान पर आधारित है मौसम विभाग

-मौसम की बदलने वाली चाल की सटीक भविष्यवाणी-भू विज्ञान पर आधारित है मौसम विभाग
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jaisalmer

विश्व मौसम विज्ञान दिवस-सटीक आंकलन से आपदाएं होगी बेअसर,भू विज्ञान पर आधारित है मौसम विभाग

जैसलमेर. मौसम की बदलने वाली चाल को पहले से भांप कर उसकी सटीक भविष्यवाणी करना मौसम विज्ञान के कारण ही संभव हो पाया है। किसी क्षेत्र में चक्रवाती तूफान, असामान्य बरसात, सर्दी या गर्मी आदि का सटीक पूर्वानुमान लगाए जाने के लिए मौसम विज्ञान की नई-नई तकनीकों से अब मुमकिन हो गया है। इस विधा में तरक्की से मानवता की बहुत बड़ी सहायता हुई है और समय रहते आने वाले कुदरती खतरों से अवगत करवा दिए जाने से संबंधित सरकारों व लोगों को बचाव के इंतजाम करने में खासी सहायता मिलने लगी है। भू-विज्ञान पर आधारित मौसम विभाग में कई विषयों पर शोध होता है। इस विज्ञान का उपयोग समय समय पर आने वाली बाढ़, सूखा, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाओं का ही नहीं बल्कि वर्षा की स्थिति, चक्रवातों की संभावनाओं और हवाई, समुद्री यातायात आदि को मौसम की सटीक जानकारी प्रदान की जाती है।
लगातार हो रही उन्नति
-पिछले कुछ अर्से के दौरान मौसम विज्ञान अति उन्नत स्तर पर पहुंच गया है।
-मौसम गुब्बारों, आधुनिक राडारों तथा उच्च तकनीक से युक्त कृत्रिम उपग्रहों के माध्यम से सटीक जानकारी मिलने लगी है।
-कृत्रिम उपग्रहों द्वारा भेजे जाने वाले उच्च स्तर के चित्रों तथा उनके द्वारा फिल्टर की गई जानकारियों से किसानों के हित में भी कदम उठाए जाने लगे हैं।
-सीमित स्तर पर मौसम विभाग विभिन्न शहरों के उच्चतम, निम्नतम तापमान, आद्र्रता, वहां हवा की गति और प्रदूषण का स्तर भी भलीभांति बता सकता है।

पूर्वानुमान लगाने की विधा
सेटेलाइट चित्र सेटेलाइट अनुभाग की ओर से जारी किए जाते हैं, जो कि हर आधे घंटे में बादलों की स्थिति का ज्ञान कराते है। इसके अलावा ये गत तीन घंटों का एनिमेशन भी दर्शाते हैं। इससे हम यह पता लगा सकते है कि कहां-कहां घने बादल हैं और उनकी गति किस दिशा में है। सेटेलाइट चित्रों से तूफानों व मौसम तंतुओं के केन्द्र का पता भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा जलवाष्प कणों की मात्रा से बादलों के शिखर का तापमान भी ज्ञात किया जा सकता है, जिससे यह अनुमान लगाने मे आसानी रहती है कि बादलों से बारिश की कितनी संभावना है। मौसम विज्ञान विभाग की ओर से मौसम संबंधी समूची जानकारी वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहती है।जिसका उपयोग कोईभी इंटरनेट सुविधा प्राप्त व्यक्ति कर सकता है।भारत मौसम विज्ञान विभाग की वेबसाइट पर मौसम पूर्वानुमान, समूचे भारत का मौसम पूर्वानुमान, विश्व मौसम संगठन की वेवसाइट पर शहर का मौसम, कड़े मौसम की चेतावनी, जिला स्तरीय पूर्वानुमान, नई दिल्ली के लिए सात दिन का पूर्वानुमान और दिल्ली का मौसम प्रतिवेदन मुहैया कराया गया है।
डाप्लर वेदर राडार
डाप्लर वेदर राडार से बारिश की तीव्रता का अनुमान लगाया जाता है, जिससे जान व माल की हानि से बचा जा सकता है। राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केन्द्र मौसम के बारे मे बुलेटिन व पूर्वानुमान जारी करता है, जिसका अध्ययन करके मौसम के बारे मे महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकती है। ऐसे में पूर्व मे तैयारी करके जान व माल की हानि से बचा जा सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग भूकम्पों की मोनेटरिंग बड़ी सावधानी से करता है और उसकी तीव्रता व केन्द्र के बारे मे तुरंत जानकारी उपलब्ध करवाता है।
चक्रवाती तूफानों पर भी रहती है निगाह
जैसलमेर के मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार विश्व में छह चक्रवाती तूफानों के निगरानी केन्द्र हैं, जिनमें से एक भारत में है जो तूफानों के रास्ते का बारीकी से अध्ययन करता है और उसके गुजरने के रास्ते का पूर्वानुमान व उसकी तीव्रता पहले ही बता देता है। ऐसे में उस रास्ते में रहने वाली आबादी को सावधान कर अथवा उन्हे वहां से हटाकर जान व माल की हानि से बचा जा सकता है।