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कैशलेश ट्रांजेक्शन की ओर बढऩे लगा बाजार

कुछ दिन पहले तक जो व्यापारी कैशलेस ट्रांजेक्शन और कार्ड स्वैपिंग से भागते थे, वे व्यापारी अब बैंकों में पीओएस मशीनों की मांग करने लग गए हैं।
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Pradeep Singh Bidawat

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Updated: 30 Nov 2016, 10:32 AM IST

जालोर. हजार और ५०० रुपए के नोटबंदी के बाद बैंकों में प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनों की डिमांड बढ़ गई है। अब हर बैंकों में पीओएस मशीनों के लिए आवेदन पहुंचने शुरू हो गए हैं। कुछ दिन पहले तक जो व्यापारी कैशलेस ट्रांजेक्शन और कार्ड स्वैपिंग से भागते थे, वे व्यापारी अब बैंकों में पीओएस मशीनों की मांग करने लग गए हैं। अब तक स्वैप मशीनों से बचने वाले व्यापारी खुद ही चलकर बैंकों में मशीन के लिए आवेदन दे रहे हैं। नोटबंदी से पहले तक ज्यादातर दुकानदारों के साथ-साथ ग्राहक भी कैशलेस ट्रांजेक्शन व कार्ड स्वैपिंग से बचते थे। दुकानदार स्वैपिंग मशीन छिपा कर रखते थे। स्वैप मशीन छिपाकर रखने वाले दुकानदारों ने व्यापार पर खतरा देख न सिर्फ मशीन को काउंटर रख दिया है। इतना ही नहीं कई व्यापारियों ने अपनी दुकानों में बाकायदा संदेश चस्पा कर दिया है कि उनके यहां 500-1000 के पुराने नोट नहीं लिए जाएंगे, लेकिन कार्ड स्वैप मशीन उपलब्ध है। दरअसल, लोगों के खातों पैसा है, लेकिन नोटबंदी के बाद उनके पास नकद राशि नहीं है। ऐसे में लोग नकदी में खरीददारी नहीं कर पा रहे हैं। जिससे बाजार में अधिकांश व्यवसाय ठप हो गया है। दुकानदार भी चिंतित है। उनका मानना है कि बाजार में नकदी की समस्या सुधरने में एक-दो महीने लग जाएंगे। ऐसे में खरीदारी शुरू नहीं हुई तो उनको काफी नुकसान होगा। इस स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने दुकानों पर स्वैप मशीनें लगाने का मानस बना लिया है ताकि खरीदार अपने के्रडिट-डेबिट कार्डसे ऑनलाइन भुगतान कर सके।

...और बदल गई स्थितियां

बड़े नोट बंद होने के साथ ही बाजार में पैसे की तंगी आने लगी। नकद में होने वाला व्यापार-धंधा पूरी तरह से प्रभावित हो गया। ऐसे में हालात से निपटने के लिए बाजार में एकाएक ही स्वैप मशीनों की मांग बढ़ गई। पूर्व में स्वैप मशीनें लगाने को लेकर बैंककर्मी व्यापारियों के यहां चक्कर लगाते थे। वहीं व्यापारियों को कैशलेश ट्रांजेक्शन का फायदा भी समझाते थे, लेकिन व्यापारी स्वैप मशीनें लगाने से आना-कानी करते थे। लेकिन बड़े नोट बंदी के बाद स्थिति यकायक बदल गई। अब वो ही दुकानदार जल्द मशीन दिलाने के लिए सिफारिश करा रहे हैं।

यह है पीओएस मशीन

पीओएस मशीन का उपयोग पैसा जमा करने, पैसा ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। खासकर दुकानों के लिए यह सिस्टम कारगार है। जिनके पास चिल्लर पैसे नहीं है, वे इस मशीन में क्रेडिट, डेबिट कार्डस्वैप कर राशि का भुगतान कर सकते हैं। साथ ही मनी ट्रांसफर भी कर सकते हैं। यह आनलाइन भुगतान करने का बेहतर विकल्प भी है। अधिकांश बैंकों की ओर से पॉकेट साइट मशीन लॉन्च की हुई है, जो अब कईदुकानों के काउंटर पर नजर आने लगी है।

यह है स्थिति

जालोर शहर में पूर्व में करीब १५-२० दुकानदारों के पास ही स्वैप मशीन लगी हुई थी। लेकिन अब बैंकों में हर रोज आवेदन पहुंच रहे हैं। ऐसे में स्वैप मशीनों का उपयोग करने वाले व्यापारियों का आंकड़ा दुगने से अधिक हो जाएगा। बैंकों से मिली जानकारी के अनुसार नोट बंदी के बाद पीओएस मशीन के लिए एक्सिस बैंक में ३४ आवेदन आए हैं। इसी तरह यूनियन बैंक में एक, पंजाब नेशनल बैंक में एक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में चार आवेदन आए हैं। ऐसे में अब बैंकों ने उपभोक्ताओं को मशीनें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।