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बेहद अनोखा है हनुमानजी का ये मंदिर, इसके ऊपर कभी नहीं टिक पाती है छत, जानिए इतिहास

शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर कानीवाड़ा स्थित हनुमानजी मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है।

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जालोर। शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर कानीवाड़ा स्थित हनुमानजी मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। पुजारियों के अनुसार यह मंदिर करीब 800 वर्ष पुराना है। मान्यता है कि मंगलवार और शनिवार को यहां फेरी देने वालों की इच्छा पूर्ण होती है।

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सभी धर्मों के लोगों सहित प्रशासनिक अधिकारी भी फेरी लगाने यहां आते हैं। मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन प्रतिमा को उसके मूलस्वरूप में ही रखा गया। कहा जाता है कि जब भी मंदिर परिसर की ऊंचाई बढ़ाई गई तो प्रतिमा भी मंदिर आंगन के अनुसार स्वयं बढ़ जाती है। करीब 150 वर्ष पहले मंदिर का जीर्णोद्धार करवाने के लिए छत डलवाई, लेकिन ठहर नहीं पाई। तब से लेकर आज तक प्रतिमा के ऊपर छत नहीं डाली गई। प्रतिमा को छोड़कर मंदिर पर छत है।

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खुदाई में मिली थी प्रतिमा
यहां के पुजारी हस्तीमल गर्ग ने बताया कि उनके पूर्वज मेवाड़ में गायों का पालन कर गुजर बसर करते थे। इस दौरान एक तपस्वी ने मेवाड़ छोड़कर मारवाड़ जाने की सलाह दी और कहा कि हनुमानजी आपके साथ रहेंगे। वे मारवाड़ के कानीपटल (कानीवाड़ा) पहुंचे तो गांव वालों के साथ खुदाई के दौरान हनुमानजी की प्रतिमा मिली। तब पातालेश्वर हनुमानजी के नाम से नामकरण हुआ। वर्तमान में गांव का नाम कानीपटल से कानीवाड़ा हुआ तो पातालेश्वर के साथ-साथ कानीवाड़ा हनुमानजी के नाम से विख्यात हुए।