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जन्म के दो माह बाद नागौरी शिशु को मिला जालोरी ‘मां’ का दूध

शिशु को जीवनदान देने के लिए मां का दूध जरूरी था, लेकिन मां के स्तन से दूध नहीं उतर रहा था। मदर मिल्क बैंक में शिशु को मां का दूध मिलने पर परिजनों की आंखों से आंसू छलक आए।
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जालोर. नागौर के एक शिशु को दो माह बाद 'मां' का दूध नसीब हुआ वह भी जालोर से। करीब दो माह पहले नागौर में जन्म हुआ था, लेकिन मां के स्तन से दूध नहीं उतर रहा था। ऐसे में शिशु को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। कुछ दिनों बाद इनको जोधपुर एम्स के लिए रैफर कर दिया, लेकिन यहां भी सत्रह दिनों तक कोई नतीजा नहीं निकला। मां का दूध नहीं मिलने से शिशु के स्वास्थ्य में दिनोंदिन गिरावट आती गई। शिशु को जीवनदान देने के लिए मां का दूध जरूरी था। इस दौरान परिजनों को किसी तरह पता चला कि मदर मिल्क बैंक में मां का दूध मिल सकता है। सर्च किया तो पता लगा जालोर में यह सुविधा संचालित है। सम्पर्क करने पर शिशु को दूध मुहैया करवाया गया। शिशु को मां का दूध मिलने पर परिजनों की आंखों से आंसू छलक आए। उन्हें आश्वस्त किया गया कि जरूरत रहने तक शिशु को यहां से दूध मुहैया करवाया जाएगा।

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आहोर से रिश्तेदार आए लेने
नागौर निवासी बाबूलाल की पत्नी आयशा ने पुत्र को जन्म दिया। मां के दूध नहीं उतरने से तत्काल ही चिकित्सकीय उपचार लिया गया, लेकिन इसके बाद भी फायदा नहीं हुआ। शिशु का वजन निरंतर कम हो रहा था। इसके बाद जोधपुर एम्स में भर्ती करवाया गया। जालोर में मदर मिल्क बैंक की सुविधा की जानकारी मिलने पर आहोर निवासी रिश्तेदार अशोक ने जालोर मिल्क बैंक से दूध लकर जोधपुर एम्स पहुंचाया।
पहली बार भेजा जिले से बाहर
मदर मिल्क बैंक में मां के दूध को विशेष पद्धति के तहत स्टोर करना पड़ता है। तापमान का भी पूरा ध्यान रखने की जरूरत रहती है। ऐसे में जोधपुर भेजने के लिए कोल्ड चेन का इस्तेमाल किया गया, ताकि शिशु को मिलने तक दूध खराब न हो। बैंक कार्मिक बताते हैं कि जिले से बाहर किसी जरूरतमंद को दूध भेजने का यह पहला मामला है। इस तरह के मामलों से लग रहा है कि यह योजना सार्थक साबित हो रही है।
बगैर दूध निकाल दिए दो माह
शिशु को जन्म के बाद से ही मां का दूध नहीं मिल रहा था। चिकित्सकीय देखरेख के बाद भी तबीयत में सुधार दर्ज नहीं किया गया। शिशु को मां के दूध की जरूरत थी। नागौर के निजी अस्पताल में 12 जून को उसका जन्म हुआ। उपचार के बाद रैफर किया तो 18 जुलाई को एम्स में भर्ती करवाया। मिल्क बैंक की जानकारी मिलने पर 4 अगस्त को जालोर से पांच यूूनिट दूध ले जाया गया।

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कारगर है योजना...
जोधपुर एम्स में भर्ती शिशु को मां के दूध की जरूरत थी। इसलिए बैंक प्रभारी डॉ. मुकेशकुमार चौधरी से चर्चा की गई। अनुमति मिलने के बाद पांच यूनिट दूध मुहैया करवाया। शिशुओं के लिए यह योजना कारगर साबित हो रही है।
- कोमल भाटी, मैनेजर, मदर मिल्क बैंक, जालोर