
Chhattisgarh Monsoon 2026 मानसून। (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Chhattisgarh Monsoon Update: जांजगीर-चांपा जिले में पिछले दो दिनों से शाम के बाद बादल छा रहे है। हालांकि बारिश हो नहीं रही है। लेकिन यह प्री-मानसून का आहट है। पिछले 10 साल में नजर डाले तो अधिकांश साल मानसून अपने तय समय से लेट से ही पहुंचा है। समय पर नहीं एक-दो साल में ही दस्तक दिया है। रविवार को बादल छाए रहे। इसके बाद मंगलवार को फिर पूरे दिन धूप ने लोगों को परेशान किया।
जांजगीर-चांपा जिले का तापमान 40 डिग्री पर पहुंच गया। अब जल्द ही प्री-मानसून के बाद मानसून जिले में दस्तक देगी। मानसून आने में देरी का यह क्रम एक दशक से जारी है। दस से पांच साल में जून बीतने के बाद ही तेज बारिश शुरू हुई है। लिहाजा इसका असर पेयजल पर पड़ने लगता है।
मौसम वैज्ञानिकों की माने तो यह मानसून पूर्व की गतिविधियां है और पिछले आंकड़ों पर गौर करें तो प्री-मानसून बारिश नहीं हो रही है, कुछ ऐसा ही इस साल भी देखने को मिला, प्री-मानसूनी (Monsoon) बारिश नहीं हो पाई। मौसम वैज्ञानिक इस वर्ष कुछ दिन बाद मानसून की आमद के बाद अच्छी बारिश की संभावना जता रहे हैं। यह स्थिति कृूषि के साथ कारोबार के लिए फायदेमंद साबित होगी। जिले की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर आधारित है और बारिश का इसमें अहम योगदान होता है।
सोमवार को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला नजर आया। सुबह से आसमान में बादलों की आवाजाही ने लोगों को तेज धूप से राहत देने का काम किया। लेकिन इसके बाद मंगलवार को फिर धूप ने परेशान किया। बादलों से उपजी उमस ने लोगों को पसीने-पसीने कर दिया। इसी तरह सोमवार को फिर पूरे दिन गर्मी व उमस ने लोगों को परेशान कर दिया। बढ़ते-घटते तापमान व बारिश नहीं होने से जिले के सभी वर्ग के लोग काफी परेशान हैं।
पर्यावरण संतुलन बिगडऩे के चलते क्षेत्र के मौसम चक्र में बीते एक दशक से बदलाव देखा जा रहा है। लगातार पेड़ों की कटाई की जा रही है, लेकिन पौधरोपण के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। कभी 1 जून से लगातार जारी रहने वाला प्री मानसून गतिविधि अब बीते दिनों की बात हो चली। आसमान में घने बादल छाते तो हैं लेकिन बरसते नहीं है। ऐसा ही कुछ पिछले दिनों सप्ताह भर से से हो रही है। बादल छा तो जरूर रहे है लेकिन बरस नहीं है।
मानसून पूर्व की गतिविधियों को आमतौर पर प्री-मानसून कहते है। उत्तर-प्रश्चिमी हवाओं के कारण तापमान में परिवर्तन और बारिश होती है। ये हवाएं अपने साथ नमी लेकर आती है।
मानसून मूलत: हिंद महासागर व अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चित तट से आने वाले बादलों को कहते हैं। मानसून आते ही पहली बारिश के साथ ही बोनी में तेजी जाएगी, देर से लगाई जाने वाली फसलें भी जल्दी लगाई जा सकेंगी।
एचपी चंद्रा, मौसम वैज्ञानिक, रायपुर के मुताबिक, दंतेवाड़ा में मानसून ने पखवाड़े भर बाद 22 को दस्तक दी है। जिले में 25 के आसपास दस्तक देगी। अब बीते कई साल से प्री मानसून जून के अंतिम सप्ताह से शुरू हो रही है। इसका प्रमुख लगातार पेड़ों की कटाई है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण बिगड़ने से ऐसा हालात निर्मित हो रही है।
Published on:
24 Jun 2026 01:33 pm
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