
इस मामले में 13 स्कूल संचालक, प्राचार्य और एक दर्जन नोडल अफसरों पर है एफआईआर, धरपकड़ शुरू
जांजगीर-चांपा बलौदा ब्लाक के दर्जनों स्कूल संचालकों द्वारा स्कॉलरशिप के नाम पर 74.58 लाख रुपए का बंदरवाट करने वाले 13 स्कूल संचालक, आधा दर्जन नोडल अफसर व प्राचार्य के खिलाफ बलौदा थाने में एफआईआर दर्ज करने के बाद इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने पर्याप्त दस्तावेज जुगाड़ करने की कवायद शुरू कर दी है। बलौदा पुलिस ने डीईओ को धारा 91 जाफ्ता फौजदारी के तहत नोटिस देकर सात बिंदुओं में जानकारी मांगी है। दस्तावेज मिल जाने के बाद आरोपियों के खिलाफ धरपकड़ शुरू कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल दाखिल किया जाएगा।
गौरतलब है कि 5 फरवरी 2018 को तत्कालीन आयुक्त बीके राजपूत ने बलौदा थाने में एफआईआर के लिए कागजात पेश किया था। जिसमें बलौदा ब्लाक के 13 स्कूलों ने छात्रवृत्ति के नाम पर बड़ा खेल किया था। इसकी जांच के लिए कैग की टीम जांच कार्रवाई के लिए जांजगीर आई थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट अजाक अफसर को सौंपी थी। मामले की फाइल बलौदा थाने में सौंप दी थी।
छह महीने जांच के बाद बलौदा पुलिस ने मामले की जांच कर स्कूल संचालक व अफसरों के खिलाफ धारा 419, 420, 409, 467, 468, 471, 34 के तहत जुर्म दर्ज किया है, जिनके खिलाफ जुर्म दर्ज हुआ है उनमें प्राचार्य आरपी शर्मा, एचपी खरे, आरएन कुर्रे, एसएल नेताम, बीईओ एवं प्राचार्य बलौदा, खिसोरा सहित स्कूल संचालकों के खिलाफ जुर्म दर्ज किया गया है।
यह है पूरा मामला
वर्ष 15.16 जिले में बलौदा ब्लाक के लेवाई, पनोरापारा, कुरमा, बगडबरी, खिसोरा, उदयपुर, अंगारखार, डोंगरी, पोंच, मिलभांठा सहित 13 स्कूलों में करोड़ो रुपए का स्कॉलरशिप घोटाला हुआ था। घोटाले में सबसे अधिक निजी स्कूल संचालकों का हाथ था। कई ऐसे स्कूलों के नाम से लाखों रुपए का स्कॉलरशिप निकाला गया था जिस नाम से स्कूल ही संचालित नहीं है।
कई स्कूलों में दर्ज संख्या से अधिक की राशि का आहरण किया गया था। कई मामले ऐसे थे जिसमें विभागीय कर्मचारी ही चारसौबीसी के आरोप में जेल भी गए थे। इसके बाद भी बंदरबाट नहीं थमा था। आसपास के ग्रामीणों ने मामले की शिकायत राज्य शासन से की थी। राज्य शासन के महालेखागार (लेखा एवं परीक्षा) की टीम ने मामले को गंभीरता से लिया था।
इसके बाद अक्टूबर, नवंबर माह में ऐसे दागी स्कूलों की जांच की थी। जांच के बाद छात्रवृत्ति के वितरण में गंभीर अनियमितता पाई थी। महालेखागार रायपुर के आडिट दल द्वारा लगाई गई आपत्ति की सत्यता प्रमाणित पाई गई थी। उपरोक्त अशासकीय संस्था प्रमुख एवं संबंधित नोडल अधिकारियों की मिलीभगत से लगभग 74 लाख 58 हजार रुपए शासकीस राशि की हेराफेरी की गई थी।
इन बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट
01. वर्ष 2011 से 2015 तक किस दिनांक में कितने का चेक जारी हुआ है।
02. तेरह स्कूलों का इनरोलमेंट प्रपत्र की सूची उपलब्ध कराएं
03. स्कूलों का दाखिल खारिज पंजी उपलब्ध कराएं
04. नोडल अधिकारियों का छात्रवृत्ति स्वीकृति आदेश वर्षवार पेस करें
05. नोडल अधिकारियों का नियुक्ति आदेश उपलब्ध कराएं
06. स्कूल बंद होने के बाद छात्रवृत्ति की मूल दस्तावेज उपलब्ध कराएं
07. घोटाले के बाद डीईओ द्वारा क्या कार्रवाई हुई इसके कागजात पेश करें
Published on:
31 Aug 2018 06:58 pm
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