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छत्तीसगढ़ की इन नारियों ने अलग-अलग क्षेत्र में काम कर बढ़ाया राज्य का मान

महिला दिवस पर विशेष
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जांजगीर चंपा

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Sandeep Kumar Upadhyay

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Updated: 8 Mar 2020, 12:56 AM IST

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रायपुर. महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से पीछे नहीं है, यह बात छत्तीसगढ़ की सैकड़ों महिलाओं ने अपने कठिन परिश्रम व समाजिक कार्य के क्षेत्र में बेहतर कार्य करके साबित कर दिया है। इन्हीं में कुछ विशेष महिलाओं ने पत्रिका से खास बातचीत में अपने कार्य और उसकी सफलता को साझा किया है। यह महिलाएं छत्तीसगढ़ राज्य का ऐसा गौरव है, जिन्हें उनके कार्य के लिए कई बार सम्मानित हो चुकी हैं और आगे भी उनका सम्मान होना है।

नशे में लिप्त बच्चों को दिया नया जीवन
नशा वर्तमान में राज्य ही नहीं पूरे देश की समस्या है। इसकी चपेट में आने से कई महिलाओं के घर उजड़ गए तो कई की कोख सूनी हो चुकी हैं। इसी बुराई को खत्म करने का प्रण लिया है दुर्ग जिले की नंदा देशमुख ने। उन्होंने बताया कि उनकी पहली ज्वाइङ्क्षनग बतौर टीचर सिरसाखुर्द प्रायमरी स्कूल में 2013 में हुई थी। उन्होंने वहां देखा कि सपेरा बस्ती के बच्चे स्कूल नहीं आते थे। पालकों से बातचीत किया तो उनका कहना था स्कूल में अमीरी गरीबी का भेद भाव किया जाता है। इसलिए वह बच्चों को नहीं भेजते। कई सालों तक पालकों को समझाने के बाद 2019 में 27 बच्चे स्कूल पहुंचे। सभी बच्चों के बाल में लट बन चुके थे, दांत इतने गंदे थे कि अन्य बच्चे उनसे दूर रहते थे। नंदा ने सभी बच्चों के बालों को ठीक किया, उन्हें रोजाना दांत साफ करना सिखाया। घर जाकर उनके कपड़े साफ किए और उन्हें सिला भी। बच्चों को स्वस्थ्य केंद्र ले जाकर उनका टेस्ट करावा। यह देख उनके पालक विरोध करने लगे। जब पालकों ने देखा कि उनके बच्चे नशे की लत से दूर होकर पढ़ाई में ध्यान दे रहे हैं तो वह शांत हुए। इसी तरह अन्य बच्चों को भी वह नशे व अन्य बुराई से हटाकर शिक्षा से जोड़ रहे हैं।

लिट्रेचर के क्षेत्र में किया बेहतर कार्य
पुलिस विभाग में कार्यरत सुजाता दास का नाम लिट्रेचर के क्षेत्र में किसी पहचान का मोहताज नहीं रहा है। उन्होंने ब्रिटिश युगीन बस्तर 1854-1947 नाम से एक किताब लिखी है। इतना ही नहीं उनकी दूसरी किताब जल्द ही आने वाली है और तीसरी किताब भी वह लिख रही हैं। इसके साथ ही सुजाता आकाशवाणी रायपुर के लिए हमेशा लिखती है। उनके लेख समाचार पत्र पत्रिकाओं में भी प्रकाशित होते हैं।

गरीबों की हर संभव मदद कर रहा शकुंतला फाउंडेशन

शकुंतला फाउंडेशन की संस्थापक व रायपुर की रहने वाली स्मिता सिंह के कार्यों की सराहना राज्य व उससे बाहर तक हो रही है। उनकी संस्था गरीब बच्चों को इलाज मुहैया कराने के लिए हमेशा तत्पर रहती है। उन्होंने मदर टेरेसा आश्रम में निवासरत विकलांग बालक आदित्य का ऑपरेशन कराया और शिक्षा मे सहयोग किया। आंबेडकर अस्पताल में दो महीने तक समयदान कर बेसहारा बुजुर्गों का उपचार कराया और उनके आश्रम मे रहने की व्यवस्था की। इसके साथ ही भिलाई में आग से प्रभावित महिला को आर्थिक सहयोग किया। कैंसर से प्रभावित मदर टेरेसा आश्रम की बालिका के उपचार में सहयोग किया। श्रमिक बस्ती के शाला त्यागी बच्चों को पुन: पाठशाला में दाखिला कराया और उनके शिक्षा में पूरी मदद कर रही हैं। इसके साथ ही कुपोषित बच्चों के लिए पोषक आहार की व्यवस्था भी उनकी संस्था करती है। इसके साथ ही मित्रों और लोगो से पुराने सामान कपड़े, किताबें, खिलौने और अन्य सामान लेकर असहाय जरूरतमंदों में वितरित करने जैसे कार्य उनकी संस्था के द्वारा किए जाते हैं।