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देशभक्ति गीतों पर भावुक हो जाता था मुकुट, वह कहता था,’मौका मिला तो सीने पर गोली खाऊंगा लेकिन पीछे नहीं हटूंगा’

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Mukut Bihari Meena

झालावाड़। 'देश की आन बान शान के लिए अपने रक्त से जिले की सरजमीं को गौरवान्वित करने वाले शहीद मुकुट बिहारी मीणा का सपना था कि वह अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपनी जान—और—तन को न्यौछावर कर दे व अपने गांव, अपने परिवार व दोस्तों को ऐसा तोहफा दे जाए कि पूरा देश उन पर नाज करें।

बचपन से ही दिल में देश सेवा का जज्बा लिए मुकुट सेना में भर्ती होने के लिए उतावला रहता था। दोस्तों के बीच राष्ट्र भक्ति की चर्चा में व देशभक्ति के गीतों पर भावुक हो जाता था'। वह कहता था कि 'अगर मुझे मौका मिला तो मैं सीने पर ही गोली खाऊंगा लेकिन पीछे नहीं हटूंगा।

यह कते हुए गांव लड़ानिया में शहीद मुकुट के सहपाठी व बालसखा सुरेंद्र मीणा की आंखों में यादों के साथ आंसू तैर गए। होश सम्भालने पर स्कूल जाने से लेकर पढ़ाई पूरी करने तक सहपाठी सुरेंद्र का साथ मुकुट से कभी नहीं छूटा।

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फौज में भर्ती होने भी रोज फोन पर यारों की बात होती थी। सुरेंद्र ने रुंधे गले से बताया कि रोज फोन पर बात होती थी परसों ही तो बहुत देर तक बात हुई। मुकुट ने फोन कर पूछा था गांव के क्या हाल है बारिश हुई या नहीं।

उसने बातचीत में बताया कि उसकी ड्यूटी कुपवाड़ा में स्पेशल टीम में लगी है और माहौल खराब है लेकिन आतंकवादियों को नाको चने चबा देगा।

सुरेंद्र को क्या पता था कि मुकुट के मुंह से निकले यह आखिरी वाक्य बहुत कुछ कह जाएगे। फोन बंद करते वक्त उसने कहा था कि अब कल बात करेंगे। हां दूसरे दिन फोन आया लेकिन उसका नहीं उसकी मौत की खबर का।

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