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‘झांसी के 140 साल पुराने परीछा बांध को विश्व धरोहर का दर्जा!’ 14 अक्टूबर को फ्रांस में मिलेगा सम्मान

Parichha Dam France October 14 Honor: उत्तर प्रदेश के झांसी में बना 140 साल पुराने पारीछा बांध को विश्व धरोहर में शामिल किया गया है। पारीछा बांध को फ्रांस में अक्टूबर में डब्ल्यूएचआईएस अवार्ड-26 दिया जाएगा।
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Jhansi Parichha Dam World Heritage

यूपी का 140 साल पुराना पारीछा बांध (फाइल फोटो)

Jhansi Parichha Dam World Heritage Site: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में स्थित करीब 140 साल पुराना परीछा (पारीछा) बांध अब विश्व धरोहर का हिस्सा बन गया है। इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज (आईसीआईडी) ने इसे वर्ल्ड हेरिटेज इरिगेशन स्ट्रक्चर (डब्ल्यूएचआईएस) के रूप में मान्यता दे दी है। इस ऐतिहासिक सिंचाई संरचना को 14 अक्टूबर 2026 को फ्रांस के मार्सेई में होने वाली 26वीं आईसीआईडी इंटरनेशनल कांग्रेस और 77वीं इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल मीटिंग के दौरान डब्ल्यूएचआईएस अवार्ड-2026 प्रदान किया जाएगा।

फ्रांस में 14 अक्टूबर को मिलेगा अवार्ड

प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि 13 अगस्त को विभाग को आईसीआईडी से पत्र मिला था, जिसमें इस सम्मान की जानकारी दी गई है। विभाग के अधिकारियों को समारोह में भाग लेने और अवार्ड ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया गया है। कांग्रेस 12 से 17 अक्टूबर तक मार्सेई में आयोजित होगी।

बुंदेलखंड की सिंचाई का पुराना सहारा

बेतवा नदी पर बना यह बांध 1881 में निर्माण शुरू होने के बाद 1886 में परिचालन में आया था। इसकी लंबाई करीब 1,174 मीटर और नदी तल से ऊंचाई लगभग 16.8 मीटर है। इसमें 318 स्टील गेट लगे हैं, जिनसे जल स्तर नियंत्रित किया जाता है। पहले इसकी जल भंडारण क्षमता करीब 1,700 मिलियन क्यूबिक फीट थी, जिसे बढ़ाकर लगभग 2,400 मिलियन क्यूबिक फीट कर दिया गया है। यह बेतवा नहर प्रणाली का मुख्य हिस्सा है, जो बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। इससे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई जिलों में खेती के लिए पानी उपलब्ध होता है।

बिजली उत्पादन में भी अहम भूमिका

बांध न केवल सिंचाई बल्कि बिजली उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे परीछा थर्मल पावर प्रोजेक्ट को पानी मिलता है, जिसकी क्षमता करीब 920 मेगावाट है। बारिश के मौसम में गेट खुलने पर यहां का जल दृश्य बेहद आकर्षक होता है, इसलिए यह पर्यटकों का पसंदीदा स्थल भी बन गया है। झांसी से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित यह जगह पिकनिक और जल क्रीड़ा के लिए लोकप्रिय है।

भारत की चार संरचनाओं को चुना गया

यह मान्यता उन सिंचाई संरचनाओं को दी जाती है जो सौ साल से अधिक पुरानी हों और आज भी अपनी मूल भूमिका निभा रही हों। इससे पहले 2022 में झांसी के ही सुकवा-दुकवान वीयर को भी इस सूची में जगह मिली थी। इस बार भारत से चार संरचनाओं को चुना गया है, जिनमें महाराष्ट्र का आष्टी मीडियम प्रोजेक्ट, राजस्थान का छपावरा बांध और तमिलनाडु का पेचिपारई बांध शामिल हैं।