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Success Story: जो लड़की कभी घर में चलाती थी मिट्टी की ट्रेन…अब सच में दौड़ाएगी भारतीय रेल, झुंझुनूं की बेटी बनी लोको पायलट

Success Story: कई बार असफलता हाथ लगने के बाद भी पूजा सैनी ने हार नहीं मानी। रेलवे में नौकरी का सपना लेकर बड़ी हुई झुंझनूं की बेटी आखिरकार भारतीय रेलवे में लोको पायलट बन गई।

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Pooja saini loco pilot

परिवार के साथ पूजा सैनी (फोटो-पत्रिका)

झुंझुनूं। कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो हालात राह की दीवार नहीं बनते। उदयपुरवाटी उपखंड के पापड़ा क्षेत्र स्थित जगदीशपुरा गांव की ढाणी तली कोठी की बेटी पूजा सैनी ने यह साबित कर दिखाया है। रेलवे में नौकरी का सपना लेकर संघर्ष कर रही पूजा सैनी का सहायक लोको पायलट परीक्षा में चयन हुआ है। 1 दिसंबर 2025 को जारी फाइनल सूची में नाम आने के बाद अब पूजा भारतीय रेल चलाएगी।

आर्थिक संकट फिर भी नहीं मानी हार

पूजा के पिता तेजपाल सैनी और माता मीरा देवी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक तंगी और बार-बार परीक्षा में असफलता के बावजूद माता-पिता ने बेटी का हौसला नहीं टूटने दिया। पूजा ने बताया कि रेलवे में जाना ही उसका लक्ष्य था। ग्रुप-डी, एनटीपीसी और लोको पायलट सहित रेलवे की कई परीक्षाओं में असफलता मिली, लेकिन प्रयास जारी रखा। आखिरकार मुंबई से दी गई परीक्षा में सफलता मिली।

छोटा भाई बना कोस्ट गार्ड

पूजा ने बताया कि वे तीन भाई-बहन हैं, जिनमें से वह सबसे छोटी है। घर में सीमित खेती है, पिता लंबे समय से बीमार रहते हैं। माता-पिता ने मजदूरी कर एक बेटे को कोस्ट गार्ड में भर्ती कराया और अब बेटी को लोको पायलट बनाया, जबकि बड़ा भाई अभी भी तैयारी कर रहा है।

बचपन का सपना हुआ साकार

पूजा सैनी बताती हैं कि बचपन से ही रेल चलाने का सपना था। घर में मिट्टी से रेलगाड़ी बनाकर खेलती थी। जब भी शहर जाती, चलती रेल को देखकर मन में यही सवाल उठता, क्या कभी मैं भी इसे चला पाऊंगी?

झुंझुनूं की बेटियां बनीं मिसाल

जिले की कई बेटियों ने बड़ी सफलता हासिल की है। मीना सोनी जयपुर मेट्रो की पहली महिला पायलट बनी थीं। वहीं मोहना सिंह देश की पहली महिला फाइटर पायलटों में शामिल हैं और वर्तमान में तेजस विमान उड़ा रही हैं।