
उदयपुरवाटी. जय माता दी…, जय माता दी…, जय माता दी…, तूने मुझे बुलाया शेरावाली ऐ…, मां शेरावालिए तेरा शेर आ गया…। ऐसे भजनों पर झूमते भक्त। हाथों में माता तीन किलोमीटर लंबी दो चुनरी, नीमच के नगाड़ों की गूंज और विशेष तोप से होती पुष्पवर्षा।ऐसा ही भक्तिमय नज़ारा रविवार को उदयपुरवाटी से शाकम्भरी तक अरावली की हरियाली पहाडिय़ों के बीच दिखाई दिया।
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शक्तिपीठ माता शाकंभरी के प्राकट्य महोत्सव को लेकर बस स्टैंड से शुरू हुई विश्व शाकंभरी कुटुंब की ओर से चुनरी पदयात्रा का दृश्य देखते ही बन रहा था। करीब पांच हजार से अधिक श्रद्धालु इस विशाल चुनरी पदयात्रा में शामिल हुए।
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बस स्टैंड पर स्थित अग्रसेन विश्राम भवन के परिसर में शाकंभरी माता के महंत दयानाथ , सीआई रामेश्वरलाल बगडिय़ा, विश्व शाकंभरी कुटुंब परिवार के संयोजक सुभाष कोलकाता, सुरेंद्र कुमार कानपुर, श्याम बिंदल नीमच आदि ने पूजा करके पदयात्रा को रवाना किया। यहां से रवाना होकर यह चुनरी पदयात्रा मुख्य बाजार, पुरानी सब्जी मंडी, नई सब्जी मंडी चौराहा , घूमचक्कर, पुलिस थाना, शाकंभरी गेट होते हुए करीब 18 किलोमीटर चलकर मां शाकंभरी के दरबार पहुंची। जहां ज्योतिषाचार्य डॉ. सुमन कुमार शर्मा की उपस्थिती में श्रद्धालुओं ने जयकारों की गूंज के साथ इस विशाल चुनरी को मां शाकंभरी की ब्रह्माणी व रुद्राणी प्रतिमाओं को अर्पित किया। चुनरी अर्पित करने के बाद गायक राकेश बावलिया ने भजनों की प्रस्तुति दी व माता शाकंभरी के मंगलपाठ किए गए।
इनका भी रहा सहयोग
पदयात्रा को सफल बनाने के लिए अग्रवाल समाज समिति, परशुराम युवा मंच, बजरंग दल, सैनी समाज संस्थान, पीपुल्स फ्रंट, युवा जागृति मंच , शिवा ग्रुप , एनएसयूआई, एबीवीपी के कार्यकर्ता आदि ने भी आगे आकर श्रद्धालुओं के लिए जलपान आदि की व्यवस्थाएं की। साथ ही स्थानीय कार्यकर्ता मूलचंद सैनी, रामस्वरूप सैनी, शिवा भाई गुर्जर, दिनेश ओलखा, विनय कुमार सैनी, सुरेंद्र तंवर, नितेश सैनी आदि ने आगे आकर सहयोग किया।
इस प्रकार बनी 9 हजार फीट लंबी चुनरी
1170 चुनरी जोड़कर माता शाकंभरी के प्राकट्य महोत्सव के लिए माता के अर्पण करने के लिए 9 हजार फीट लंबी चुनरी बनाई गई। इनको एक साथ जोडऩे का कार्य जयपुर में किया गया। पदयात्री 9 हजार फीट लंबी (करीब 3किलोमीटर) चुनरी को हाथों में थामे सकराय पहुंचे।