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राजस्थान में आवारा पशुओं पर हाईकोर्ट सख्त, नगर निगमों को विशेष अभियान का आदेश

न्यायाधीश कुलदीप माथुर और रवि चिरानिया की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दायर याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कहा गया कि आवारा पशुओं के हमले बढ़ गए हैं।

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HC on animals

आवारा पशुओं पर हाईकोर्ट सख्त (फोटो-पत्रिका)

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने शहरों और राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने के लिए नगर निगमों, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य विभागों को सख्त निर्देश दिए हैं। राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश पंवार और केंद्र की ओर से बी.पी. बोहरा ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि अगली सुनवाई तक तत्काल कार्रवाई जरूरी है।

न्यायाधीश कुलदीप माथुर और रवि चिरानिया की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दायर याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि आवारा पशुओं के कारण नागरिकों को होने वाली परेशानी और खतरा बढ़ रहा है, जिससे न केवल जनजीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि राज्य की पर्यटन छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है।

पशुओं के हमले की बढ़ रही घटनाएं

न्याय मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य, प्रियंका बोराणा और हेली पाठक ने तर्क दिया कि केंद्र और राज्य के कानून नगर निगमों, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य विभागों को सड़कों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी देते हैं। उन्होंने कहा कि लापरवाही के कारण आवारा पशुओं के हमले और काटने की घटनाएं बढ़ी हैं। कोर्ट ने उनके सुझावों के लिए दो सप्ताह का समय दिया।

कोर्ट ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

कोर्ट ने नगर निगमों को आदेश दिया कि वे अगली सुनवाई तक कुत्तों के आश्रय स्थल और गोशालाओं की स्थिति व रख-रखाव पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। साथ ही, आवारा पशुओं को हटाने के लिए उपलब्ध कर्मचारियों, डॉक्टरों और सहायक कर्मियों की संख्या की जानकारी देने को कहा।

नगर निगमों को शहर की सड़कों से आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने का आदेश दिया गया, जिसमें पशुओं को कम से कम नुकसान हो। यदि कोई व्यक्ति या समूह इस कार्य में बाधा डालता है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई, जैसे प्राथमिकी दर्ज करने की छूट दी गई।

पशुओं को इन जगहों पर खिलाएं खाना

नगर निगमों को शिकायत दर्ज करने के लिए टेलीफोन नंबर या ईमेल आइडी अधिसूचित करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने जनता से अपेक्षा जताई कि पशुओं को खाना खिलाने या उनकी देखभाल करने की गतिविधियां नगर निगमों या निजी संगठनों की ओर से संचालित आश्रय स्थलों और गोशालाओं में की जाए।

अगली सुनवाई 8 सितंबर को

जोधपुर नगर निगम को एम्स जोधपुर और जिला न्यायालय परिसर से प्राथमिकता के आधार पर आवारा पशुओं को हटाने का आदेश दिया गया। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग प्राधिकरण को नियमित गश्त कर सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने और वाहनों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने को कहा गया। मामले की अगली सुनवाई आठ सितंबर 2025 को होगी।